यत्र गावः प्रसन्नाः स्युः प्रसन्नास्तत्र सम्पदः।
यत्र गावो विषण्णाः स्युर्विषण्णास्तत्र सम्पदः॥
जहाँ गायें प्रसन्न रहती है, वहाँ समस्त सम्पदाएँ प्रसन्न होकर प्राप्त रहती है, और जहाँ गायें दुःखी रहती है, वहाँ सम्पदाएँ दुःखी होकर लुप्त हो जाती है।
#गौमहिमा


