Praveen Kumar Yadav
आज विश्व बालश्रम निषेध दिवस है।अनुच्छेद 24,भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण अनुच्छेद है जो बाल श्रम पर रोक लगाता है।हर 12 जून को,अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ILO घटकों और दुनिया भर के भागीदारों के साथ मिलकर विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस मनाता है।इसकी शुरुआत 2002 में हुई थी।यह 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों,खदानों या किसी भी अन्य खतरनाक कार्य में काम करने से रोकता है।यह शोषण के विरुद्ध अधिकार के अंतर्गत आता है।बाल श्रम पर रोक लगाकर,अनुच्छेद 24 बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार देता है,जिससे वे अपना विकास कर सकें और कुशल बन सकें।यह अनुच्छेद बच्चों को खतरनाक या शोषणकारी कार्यों से बचाता है और उनके शारीरिक और मानसिक विकास की रक्षा करता है।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 23 खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है।इसके अलावा, भारत में बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम और राष्ट्रीय बालश्रम नीति जैसे कदम उठाए गए हैं।इस दिवस को मनाने का लक्ष्य बच्चों को कारखानों व मजदूरी से निकालकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और उनके अधिकारों का संरक्षण प्रदान करना है।दुनिया भर में लगभग 13.8 करोड़ बच्चे (138 मिलियन) बाल श्रम में लगे हुए हैं, जो वैश्विक स्तर पर सभी बच्चों का लगभग 8% है।इनमें से 5.4 करोड़ बच्चे ऐसे खतरनाक कामों (जैसे- खनन, कृषि, और घरेलू काम) में लगे हैं जो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सीधे तौर पर हानिकारक हैं।बाल श्रम में लगभग 7.8 करोड़ लड़के और 5.9 करोड़ लड़कियाँ शामिल हैं।सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 61%) कृषि क्षेत्र में कार्य करता है, इसके बाद 27% सेवाओं (जैसे घरेलू कार्य और सड़क पर फेरी लगाना) और 13% उद्योग (निर्माण और खनन) में कार्यरत हैं।आइए इस विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर हम सभी संकल्प ले कि अपने आसपास बाल श्रम नहीं होने देंगे तथा इन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करेंगे,तभी यह दिवस मनाना सार्थक होगा।साक्षरता में वृद्धि कर के ही हम सभी बालश्रम पर रोक लगा सकते हैं।🙏🙏🙏
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