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Self reflection #very true lines
very true lines - 6. সাস-নিবীঃতা (Self-Reflection) फेरत जुग भया, फिरा न मन का माला %<I कर का मन का डारि दे, मन का मनका फेर।। अर्थः माला जपते हुए कई युग बीत गए, लेकिन मन की चंचलता नहीं गई। हाथ की माला छोड़कर मन के मोतियों (मन की चंचलता) को बदलो। 6. সাস-নিবীঃতা (Self-Reflection) फेरत जुग भया, फिरा न मन का माला %<I कर का मन का डारि दे, मन का मनका फेर।। अर्थः माला जपते हुए कई युग बीत गए, लेकिन मन की चंचलता नहीं गई। हाथ की माला छोड़कर मन के मोतियों (मन की चंचलता) को बदलो। - ShareChat