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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून #🌹प्रेमरंग #🥰प्रेम कविता📝 #📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - जिन चेहरों पर अक्सर निगाहें रुक जाती थी चेहरे a अब कही दिखाई नहीं देते शायद मिल गई है মঁতিল ওল্ক हम महिपिलों मे उदास बैठे उन्हें दिखाई नहीं देते hansraj जिन चेहरों पर अक्सर निगाहें रुक जाती थी चेहरे a अब कही दिखाई नहीं देते शायद मिल गई है মঁতিল ওল্ক हम महिपिलों मे उदास बैठे उन्हें दिखाई नहीं देते hansraj - ShareChat