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#तुलसी दास तुलसी दास कबीर #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🙏कर्म क्या है❓
तुलसी दास तुलसी दास कबीर - बोलने वाली गुफा एक जंगल में खरनखर नामक शेर रहता था। एक दिन वह शिकार की तलाश  4aga] दूर निकल गया। शाम हो गई, लेकिन कोई शिकार उसके हाथ नहीं लगा था। वह थक गया था। एक पहाड़ी की तलहटी में उसे एक गुफा दिखाई पड़ी। वह गुफा के अंदर चला गया। गुफा खाली थी। शेर ने सोचा अवश्य यहाँ रहने वाला जानवर बाहर गया है। रात होते होते वह वापस ज़रूर आएगा। तब तक यहीं छुपकर बैठ जाता हूँ। जब वह जानवर लौटेगा , तो उसे मारकर खा जाऊँगा और अपनी भूख मिटा लूंगा। वह गुफा में एक कोने में छुपकर बैठ गया। = वह गुफा दक्षिपुच्छ नामक गीदड़ की थी। जब वह लौटा, तो देखा कि शेर के पंजों के निशान उसकी गुफा के अंदर जा रहे हैं। लेकिन बाहर आते हुए पंजों के निशान उसे दिखाई नहीं पडे़े। वह समझ गया कि उसकी गुफा में कोई शेर गया है और वह अब भी अंदर ही बैठा है। लगाने की शेर गुफा में बैठा है या नहीं, उसने एक युक्ति सोची। वह गुफा यह पता के द्वार पर खडा होकर तेज आवाज़ में बोला , प्यारी गुफा! मैं वापस आ गया हूँ। तुमने कहा था कि मेरे वापस आने पर तुम मेरा स्वागत करोगी। लेकिन तुम तो चुप हो। क्या बात है? तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही हो? की आवाज़ शेर के कानों में पडी , तो उसने सोचा - ्ये गुफा अवश्य 5٨4؟ गीदड़  के आने 577723 करते शायद आज यह चुप पर उसका स्वागत गीदड़ 7 को संदेह न हो जाए और वह वापस न चला है। अगर गुफा " तो कहीं  जाए।' वह गरज कर बोला, आओ मित्र! तुम्हारा स्वागत है। जल्दी अंदर आओ। ' डर गया। वह उल्टे पांव वहाँ से भाग खडा हुआ। शेर गीदड़ 7 शेर की गरज सुनकर बहुत देर तक गीदड़ के अंदर आने की प्रतीक्षा करता रहा, लेकिन वह व्यर्थ रहा।  कुछ देर में उसे समझ आ गया कि गीदड़ उसे मूर्ख बनाकर भाग गया। उसे अपनी  मूर्खता पर बहुत क्रोध आया, किंतु अब देर हो चुकी थी। वह पछताने लगा। सीखः भविष्य के संकट को भांपकर जो बचने की युक्ति निकाल ले, वह बुद्धिमान होता है। हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले 35 बोलने वाली गुफा एक जंगल में खरनखर नामक शेर रहता था। एक दिन वह शिकार की तलाश  4aga] दूर निकल गया। शाम हो गई, लेकिन कोई शिकार उसके हाथ नहीं लगा था। वह थक गया था। एक पहाड़ी की तलहटी में उसे एक गुफा दिखाई पड़ी। वह गुफा के अंदर चला गया। गुफा खाली थी। शेर ने सोचा अवश्य यहाँ रहने वाला जानवर बाहर गया है। रात होते होते वह वापस ज़रूर आएगा। तब तक यहीं छुपकर बैठ जाता हूँ। जब वह जानवर लौटेगा , तो उसे मारकर खा जाऊँगा और अपनी भूख मिटा लूंगा। वह गुफा में एक कोने में छुपकर बैठ गया। = वह गुफा दक्षिपुच्छ नामक गीदड़ की थी। जब वह लौटा, तो देखा कि शेर के पंजों के निशान उसकी गुफा के अंदर जा रहे हैं। लेकिन बाहर आते हुए पंजों के निशान उसे दिखाई नहीं पडे़े। वह समझ गया कि उसकी गुफा में कोई शेर गया है और वह अब भी अंदर ही बैठा है। लगाने की शेर गुफा में बैठा है या नहीं, उसने एक युक्ति सोची। वह गुफा यह पता के द्वार पर खडा होकर तेज आवाज़ में बोला , प्यारी गुफा! मैं वापस आ गया हूँ। तुमने कहा था कि मेरे वापस आने पर तुम मेरा स्वागत करोगी। लेकिन तुम तो चुप हो। क्या बात है? तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही हो? की आवाज़ शेर के कानों में पडी , तो उसने सोचा - ्ये गुफा अवश्य 5٨4؟ गीदड़  के आने 577723 करते शायद आज यह चुप पर उसका स्वागत गीदड़ 7 को संदेह न हो जाए और वह वापस न चला है। अगर गुफा " तो कहीं  जाए।' वह गरज कर बोला, आओ मित्र! तुम्हारा स्वागत है। जल्दी अंदर आओ। ' डर गया। वह उल्टे पांव वहाँ से भाग खडा हुआ। शेर गीदड़ 7 शेर की गरज सुनकर बहुत देर तक गीदड़ के अंदर आने की प्रतीक्षा करता रहा, लेकिन वह व्यर्थ रहा।  कुछ देर में उसे समझ आ गया कि गीदड़ उसे मूर्ख बनाकर भाग गया। उसे अपनी  मूर्खता पर बहुत क्रोध आया, किंतु अब देर हो चुकी थी। वह पछताने लगा। सीखः भविष्य के संकट को भांपकर जो बचने की युक्ति निकाल ले, वह बुद्धिमान होता है। हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले 35 - ShareChat