ShareChat
click to see wallet page
search
#good morning #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #राधा रानी #🌞 Good Morning🌞
good morning - ச 3் 5 3் 5 3் ச3் 53் ச3் 5மO் 5 ஓிதன मयूर पंख क्यों धारण करते है ? ؟ y वनवास के दौरान माँ सीता को पानी की प्यास लगी। श्री राम जी ने चारों ओर देखा। तभी वहां एक मयूर ने आ कर श्री रामजी से कहा कि आगे थोड़ी दूर पर एक जलाशय है। किंतु मार्ग में हमारी भूल चूक होने की संभावना है। ؟ मैं उड़ता 7 श्री रामजी ने पूछा वह क्यों ? तब मयूर ने उत्तर दिया कि हुआ जाऊँगा और आप चलते हुए आएंगे। इसलिए मार्ग में मैं अपना एक एक पंख बिखेरता हुआ जाऊंगा। उस के सहारे आप जलाशय पहुंच जाओगे। 5 मयूर के पंख, एक विशेष ऋतु में ही बिखरते हैं। अगर वह अपनी इच्छा विरुद्ध पंखों को बिखेरेगा तो उसकी मृत्यु हो जाती है। वही हुआ।  अंत में जब मयूर अपनी अंतिम सांस ले रहा होता है तो उसने कहा कि वह ५ कितना भाग्यशाली है की जो जगत की प्यास बुझाते हैं ऐसे प्रभु की प्यास बुझाने का उसे सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्री राम ने मयूर से कहा की- मेरे लिए तुमने जो मयूर पंख बिखेरकर, भगवान ऋणानुबंध चढ़ाया है, मैं उस ऋण को अगले जन्म में जरूर चुकाऊंँगा।  फिर अगले जन्म में , भगवान राम ने कृष्ण का अवतार लिया और अपने सिर पर मोरपंख धारण किया। सीख भगवान अपने भक्तों का ऋण कभी नहीं भूलते और किसी न किसी रूप में उसे चुकाते हैं। सेवा और त्याग का फल अवश्य मिलता है। हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले சு 3் ச 3் ச 3் த 3் ச 3் 4 3் 5 3் 7 ೆ ச 3் 5 3் 5 3் ச3் 53் ச3் 5மO் 5 ஓிதன मयूर पंख क्यों धारण करते है ? ؟ y वनवास के दौरान माँ सीता को पानी की प्यास लगी। श्री राम जी ने चारों ओर देखा। तभी वहां एक मयूर ने आ कर श्री रामजी से कहा कि आगे थोड़ी दूर पर एक जलाशय है। किंतु मार्ग में हमारी भूल चूक होने की संभावना है। ؟ मैं उड़ता 7 श्री रामजी ने पूछा वह क्यों ? तब मयूर ने उत्तर दिया कि हुआ जाऊँगा और आप चलते हुए आएंगे। इसलिए मार्ग में मैं अपना एक एक पंख बिखेरता हुआ जाऊंगा। उस के सहारे आप जलाशय पहुंच जाओगे। 5 मयूर के पंख, एक विशेष ऋतु में ही बिखरते हैं। अगर वह अपनी इच्छा विरुद्ध पंखों को बिखेरेगा तो उसकी मृत्यु हो जाती है। वही हुआ।  अंत में जब मयूर अपनी अंतिम सांस ले रहा होता है तो उसने कहा कि वह ५ कितना भाग्यशाली है की जो जगत की प्यास बुझाते हैं ऐसे प्रभु की प्यास बुझाने का उसे सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्री राम ने मयूर से कहा की- मेरे लिए तुमने जो मयूर पंख बिखेरकर, भगवान ऋणानुबंध चढ़ाया है, मैं उस ऋण को अगले जन्म में जरूर चुकाऊंँगा।  फिर अगले जन्म में , भगवान राम ने कृष्ण का अवतार लिया और अपने सिर पर मोरपंख धारण किया। सीख भगवान अपने भक्तों का ऋण कभी नहीं भूलते और किसी न किसी रूप में उसे चुकाते हैं। सेवा और त्याग का फल अवश्य मिलता है। हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले சு 3் ச 3் ச 3் த 3் ச 3் 4 3் 5 3் 7 ೆ - ShareChat