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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - 4+ हमें यही सूत्र जीवन में उतारना होगा बी पाज़िटिव। जिस प्रकार मछली को जल से बाहर निकालने पर वह छटपटाने लगती है और उसका प्राणांत निश्चित हो जाता है ठीक उसी प्रकार पद, 774,4/487,44,4914, ,रूतबा, ये सब व्याधियां ही जानिये।इनके ओहदा , आगोश में खोया हुआ मनुष्य इनका गुलाम हो जाता है,आदी हो जाता है जबकि ये सारी चीजें अस्थायी की है, परिवर्तन शील है।यह बात हमें समझनी प्रकृति पृष्ठभूमि में लागू नहीं होगी कि शाश्वतता का नियम इस होता है। जब हम इन सब बातों पर विचार करते हैं तब बोध और होश का जन्म होता है और हमारी खिलावट आती है। हम तभी अपने वर्तमान का मजा ले पाते हैं और जीवन के सतत् प्रवाह में बहने तत्पर होते हैं। ओशों की देशना यही है कि यहां सब कुछ अस्थायी प्रकृति की है। परिवर्तन शील है और यह बोध हो जाना ही बुद्धत्व की ओर अग्रसर करता है व्यक्ति में साहस और परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है।आज जो रूतबा, धन, यश,पद, प्रतिष्ठा है कल वह नहीं रहेगी, कम हो सकती है और 4+ हमें यही सूत्र जीवन में उतारना होगा बी पाज़िटिव। जिस प्रकार मछली को जल से बाहर निकालने पर वह छटपटाने लगती है और उसका प्राणांत निश्चित हो जाता है ठीक उसी प्रकार पद, 774,4/487,44,4914, ,रूतबा, ये सब व्याधियां ही जानिये।इनके ओहदा , आगोश में खोया हुआ मनुष्य इनका गुलाम हो जाता है,आदी हो जाता है जबकि ये सारी चीजें अस्थायी की है, परिवर्तन शील है।यह बात हमें समझनी प्रकृति पृष्ठभूमि में लागू नहीं होगी कि शाश्वतता का नियम इस होता है। जब हम इन सब बातों पर विचार करते हैं तब बोध और होश का जन्म होता है और हमारी खिलावट आती है। हम तभी अपने वर्तमान का मजा ले पाते हैं और जीवन के सतत् प्रवाह में बहने तत्पर होते हैं। ओशों की देशना यही है कि यहां सब कुछ अस्थायी प्रकृति की है। परिवर्तन शील है और यह बोध हो जाना ही बुद्धत्व की ओर अग्रसर करता है व्यक्ति में साहस और परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है।आज जो रूतबा, धन, यश,पद, प्रतिष्ठा है कल वह नहीं रहेगी, कम हो सकती है और - ShareChat