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#shiksha or sahitya #sahitya #realty of life #I feel it
shiksha or sahitya - श्रद्वाजाल 00 हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था व्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता था इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया मैंने हाथ बढ़ाया मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ मुझे वह नहीं जानता था मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था हम दोनों साथ चले दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे साथ चलने को जानते थे। @ kalaa .darpan विनोद कुमार शुक्ल जनवरी १९३७ - २३ दिसंबर २०२५ फला दर्पण श्रद्वाजाल 00 हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था व्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता था इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया मैंने हाथ बढ़ाया मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ मुझे वह नहीं जानता था मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था हम दोनों साथ चले दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे साथ चलने को जानते थे। @ kalaa .darpan विनोद कुमार शुक्ल जनवरी १९३७ - २३ दिसंबर २०२५ फला दर्पण - ShareChat