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#मिर्ज़ा ग़ालिब “हाथों की लकीरों पर मत जा ए ग़ालिब, नसीब उनके भी होते हैं, जिनके हाथ नहीं होते !” — मिर्ज़ा ग़ालिब (27 दिसंबर 1796 – 15 फरवरी 1869) अपनी शायरी से हर व्यक्ति को भाव-विभोर कर देने वाले उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के महान शायर “मिर्जा ग़ालिब जी” की 229वीं जयंती पर सादर श्रद्धांजलि ! #✍️मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी #मिर्ज़ा ग़ालिब जयंती #मिर्ज़ा-ग़ालिब-जंयती⚘️💐❣️ #मिर्जा गालिब शायरी
मिर्ज़ा ग़ालिब - २७ दिसंबर २०२५ @Harish_Jahirey अपनी शायरी से हर व्यक्ति 27 Dec को भाव विभोर कर देने वाले उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब जो की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। "हाथों की लकीरों पर मत जा ए ग़ालिब, नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते ।" मिर्ज़ा ग़ालिब (२७ दिसंबर १७९६ ~ १५ फरवरी १८६९ ) /harish jahirey २७ दिसंबर २०२५ @Harish_Jahirey अपनी शायरी से हर व्यक्ति 27 Dec को भाव विभोर कर देने वाले उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब जो की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। "हाथों की लकीरों पर मत जा ए ग़ालिब, नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते ।" मिर्ज़ा ग़ालिब (२७ दिसंबर १७९६ ~ १५ फरवरी १८६९ ) /harish jahirey - ShareChat