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News Today - पीजी की १८ हजार सीटें खाली रहजाने पर फैसला शून्यपर्सेंटाइलपर भी मेडिकलपीजी नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। अधिकृत आवंटनकेवल मेडिकलसोटों केलिए वैसे तोमारामारी रहती है, लेकिनइस साल मेडिकल को काउंसलिंगसे होगा पीजी सोटों को भर पाना मुश्किलहो रहा हे।दूसरे दौर की काउंसलिंग के बाद " सीटों का आवंटन केवल अधिकृत ೯ काउंसलिंग व्यवस्था के जरिए ही पोजी की करोब १८ हजार सोटें खालो किया जाएगा | किसी भी तरह के हैं। सरकार को सीटों के नहीं भर पाने सीधे या विवेकाधीन दाखिले की को आशंका है।इस वजह से नीट पीजी  अनुमति नहीं होगी | भारतीय चिकित्सा  का कटऑफ घटाकर शून्य पर्सेंटाइल आयोग ( एनएमसी ) ने रिक्त सीटों को फैसला  लिया गया है। तक करनका भरने और स्वास्थ्य सेवाओं को स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया  मजबूत करने की जरूरत का हवाला  कि सोटों के नहीं भर पाने के कारण देते हुए १२ जनवरी को औपचारिक  प्रवेश केलिए नीट पीजी कोी ५० फीसदी रूप से सरकार से क्वालिफाईंग  पर्सेन्टाइल की अर्हता को घटाकर सात कट - ऑफ' में संशोधन का अनुरोध  पर्सेन्टाइल कर दिया गया है॰ जबकि किया था। आरक्षित श्रेणियों के लिए इसे ४० से पर्सेन्टाइल कर दिया गया पर्सेन्टाइल की अर्हता को पर्सेन्टाइल कोघटाकर 40থু্ন্নন্কহনক্ীঘথক 50 1=1 घटाकर कि पिछले कई वर्षों से # घटाकर सात किया गया बता सरकारी और निजी मेडिकल कालेजों में पीजी में सोटें खाली रह जा रहो हैं। फाइमानेकेंद्रीयस्वास्थ्यमंत्रीनड्डाकोपत्रलिखा  इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में टिप्पणी की थी और सरकार से कहा था लखनऊ | मेडिकल की पीजी सीटों पर दाखिले के लिए कटऑफ जीरो कि सोटें खाली नहों जानी चाहिए। fcr' उत्तर प्रदेश के डॉक्टर संगठन में नाराजगी है। परसेंटाइल किए जाने के हालांकि , पहले इतनी बड़ी संख्या में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ( फाइमा ) ने इसके खिलाफ सीटें खाली नहीं रहती थीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा हे। अब संगठन की यूपी इकाई भी ब्रजेश पाठक को ज्ञापन सोपने की तयारी में हे।दो ८० हजार से अधिक सीटेंः सूत्रों इसके खिलाफ उप मुख्यमत्री  चरणों की काउंसलिंग के बाद यूपी में करीब १२०० सीटें खाली हैं। उत्तर प्रदेश  के अनुसार सीटों के खाली रहने को में मेडिकल के पीजी कोर्स की १२०० सीटों में से निजी कॉलेजों में खाली  सभी  पीछेकईवजहेंहोसकती हैं।पहली बात  नॉन क्लीनिकल ब्रांच की हें। यहहै कि नीट पौजी को सोटें ८० हजार से अधिक हो चुकी हैं, जो जरूरत से ज्यादा हैं।दूसरा, पोजी मेंकईऐसेविषय  खाली रह जाने का कारण है। सूत्रों ने अधिक फीस होना भी वजहः है जिन्हें उम्मीदवार नहीं लेना चाहते है निजी कॉलेजों में फीस ज्यादा होना बताया किसंशोधनका उद्देश्यउपलब्ध जैसे एनाटामी, फिजियोलॉजी, बायो मैनेजमेंट कोटे में ज्यादा डोनेशनल को सीोटोंका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित  केमिस्ट्री आदि। इनकी ज्यादातर सीटें का विदेश में करना है॰ जो चिकित्सा विशेषज्ञों की मांग छात्रा करना  महत्वपूर्ण है।  লিব खाली रह जाती हैं। अध्ययन को तरजीह देना भी सीटें संख्या बढ़ाने के पीजी की १८ हजार सीटें खाली रहजाने पर फैसला शून्यपर्सेंटाइलपर भी मेडिकलपीजी नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। अधिकृत आवंटनकेवल मेडिकलसोटों केलिए वैसे तोमारामारी रहती है, लेकिनइस साल मेडिकल को काउंसलिंगसे होगा पीजी सोटों को भर पाना मुश्किलहो रहा हे।दूसरे दौर की काउंसलिंग के बाद " सीटों का आवंटन केवल अधिकृत ೯ काउंसलिंग व्यवस्था के जरिए ही पोजी की करोब १८ हजार सोटें खालो किया जाएगा | किसी भी तरह के हैं। सरकार को सीटों के नहीं भर पाने सीधे या विवेकाधीन दाखिले की को आशंका है।इस वजह से नीट पीजी  अनुमति नहीं होगी | भारतीय चिकित्सा  का कटऑफ घटाकर शून्य पर्सेंटाइल आयोग ( एनएमसी ) ने रिक्त सीटों को फैसला  लिया गया है। तक करनका भरने और स्वास्थ्य सेवाओं को स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया  मजबूत करने की जरूरत का हवाला  कि सोटों के नहीं भर पाने के कारण देते हुए १२ जनवरी को औपचारिक  प्रवेश केलिए नीट पीजी कोी ५० फीसदी रूप से सरकार से क्वालिफाईंग  पर्सेन्टाइल की अर्हता को घटाकर सात कट - ऑफ' में संशोधन का अनुरोध  पर्सेन्टाइल कर दिया गया है॰ जबकि किया था। आरक्षित श्रेणियों के लिए इसे ४० से पर्सेन्टाइल कर दिया गया पर्सेन्टाइल की अर्हता को पर्सेन्टाइल कोघटाकर 40থু্ন্নন্কহনক্ীঘথক 50 1=1 घटाकर कि पिछले कई वर्षों से # घटाकर सात किया गया बता सरकारी और निजी मेडिकल कालेजों में पीजी में सोटें खाली रह जा रहो हैं। फाइमानेकेंद्रीयस्वास्थ्यमंत्रीनड्डाकोपत्रलिखा  इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में टिप्पणी की थी और सरकार से कहा था लखनऊ | मेडिकल की पीजी सीटों पर दाखिले के लिए कटऑफ जीरो कि सोटें खाली नहों जानी चाहिए। fcr' उत्तर प्रदेश के डॉक्टर संगठन में नाराजगी है। परसेंटाइल किए जाने के हालांकि , पहले इतनी बड़ी संख्या में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ( फाइमा ) ने इसके खिलाफ सीटें खाली नहीं रहती थीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा हे। अब संगठन की यूपी इकाई भी ब्रजेश पाठक को ज्ञापन सोपने की तयारी में हे।दो ८० हजार से अधिक सीटेंः सूत्रों इसके खिलाफ उप मुख्यमत्री  चरणों की काउंसलिंग के बाद यूपी में करीब १२०० सीटें खाली हैं। उत्तर प्रदेश  के अनुसार सीटों के खाली रहने को में मेडिकल के पीजी कोर्स की १२०० सीटों में से निजी कॉलेजों में खाली  सभी  पीछेकईवजहेंहोसकती हैं।पहली बात  नॉन क्लीनिकल ब्रांच की हें। यहहै कि नीट पौजी को सोटें ८० हजार से अधिक हो चुकी हैं, जो जरूरत से ज्यादा हैं।दूसरा, पोजी मेंकईऐसेविषय  खाली रह जाने का कारण है। सूत्रों ने अधिक फीस होना भी वजहः है जिन्हें उम्मीदवार नहीं लेना चाहते है निजी कॉलेजों में फीस ज्यादा होना बताया किसंशोधनका उद्देश्यउपलब्ध जैसे एनाटामी, फिजियोलॉजी, बायो मैनेजमेंट कोटे में ज्यादा डोनेशनल को सीोटोंका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित  केमिस्ट्री आदि। इनकी ज्यादातर सीटें का विदेश में करना है॰ जो चिकित्सा विशेषज्ञों की मांग छात्रा करना  महत्वपूर्ण है।  লিব खाली रह जाती हैं। अध्ययन को तरजीह देना भी सीटें संख्या बढ़ाने के - 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