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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - दीवारों के कान नहीं होते "साहब" कोई अपना ही ग़द्दार होता है !! दीवारों के कान नहीं होते "साहब" कोई अपना ही ग़द्दार होता है !! - ShareChat