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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - जिस तरह चढ़ता है, उसी तरह उतरता है। लिए कौन ठहरता है। चोटियों पर सदा के बहोत ग़ुरूर न कर अपनेआप पे ऐ दोस्त, मिट्टी का खिलौना है, टूटकर बिखरता है। हर हाल में ख़ुश रहता हूँ बस ये सोचकर वक़्त जैसा भी हो, एक মুড়বনা ট1 3 ख़ौफ़ नहीं मुझको दरिया की गहराई से का हुनर हो वो उभरता है। जिसमें डूबने हालात से लड़ता रहूँगा तबतक ' तनहा , जबतक बिगड़ा मुक़द्दर नहीं सँवरता है। जिस तरह चढ़ता है, उसी तरह उतरता है। लिए कौन ठहरता है। चोटियों पर सदा के बहोत ग़ुरूर न कर अपनेआप पे ऐ दोस्त, मिट्टी का खिलौना है, टूटकर बिखरता है। हर हाल में ख़ुश रहता हूँ बस ये सोचकर वक़्त जैसा भी हो, एक মুড়বনা ট1 3 ख़ौफ़ नहीं मुझको दरिया की गहराई से का हुनर हो वो उभरता है। जिसमें डूबने हालात से लड़ता रहूँगा तबतक ' तनहा , जबतक बिगड़ा मुक़द्दर नहीं सँवरता है। - ShareChat