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#भगवत गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓
भगवत गीता - विश्वरूप के दर्शन की महिमा का भगवान द्वारा अपने चतुर्भुज और सौम्य रूप का दिखाया जाना I श्रीभगवानुवाच मया प्रसत्नेन तवार्जुनेदरूप परं दर्शितमात्मयोगात्। तेजोमयं विश्वमनन्तमाद्यंयन्मे त्वदन्येन न दृष्टपूर्वम्।। श्री भगवान बोले हे अर्जुन! अनुग्रहपूर्वक मैने अपनी योगशक्तिके प्रभाव सेयह मेरे परम तजामय सबका 3 और सीमारहित विराट् रूप तुझको दिखाया है जिसेतेरे अतिरिक्त द्रूसरे किसी ने पहले नहीं देखा था ||47|| व्याख्याः इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जून से कहते हैं कि वे उन्हें अपना दिव्य और विराट रूप दिखा रहेहै। यह रूप अत्यंत तिजस्वा ओर अनंत हैजो सम्पूर्ण ब्रिह्माड को समेटे हएहा यहस्वरूप पूर्ण रूप से अद्रुृत और अनदेखा है जिसे पहले किसीनेभी नहीं देखा। भगवान के इस विराट रूप में उनका दिव्य तेज, अनंतता और विश्व व्यापी स्वरूप जो केवल उनके दिव्य योग की शक्ति से प्रकट होता है संभव है। अर्जन को इस दिव्य रूप के दर्शन से यह समझ मे आता है।कि भगवान का स्वरूप न केवल अद्द्भृत है बल्कि उसकी विशालता और शक्ति भी अतुलनीय हा विश्वरूप के दर्शन की महिमा का भगवान द्वारा अपने चतुर्भुज और सौम्य रूप का दिखाया जाना I श्रीभगवानुवाच मया प्रसत्नेन तवार्जुनेदरूप परं दर्शितमात्मयोगात्। तेजोमयं विश्वमनन्तमाद्यंयन्मे त्वदन्येन न दृष्टपूर्वम्।। श्री भगवान बोले हे अर्जुन! अनुग्रहपूर्वक मैने अपनी योगशक्तिके प्रभाव सेयह मेरे परम तजामय सबका 3 और सीमारहित विराट् रूप तुझको दिखाया है जिसेतेरे अतिरिक्त द्रूसरे किसी ने पहले नहीं देखा था ||47|| व्याख्याः इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जून से कहते हैं कि वे उन्हें अपना दिव्य और विराट रूप दिखा रहेहै। यह रूप अत्यंत तिजस्वा ओर अनंत हैजो सम्पूर्ण ब्रिह्माड को समेटे हएहा यहस्वरूप पूर्ण रूप से अद्रुृत और अनदेखा है जिसे पहले किसीनेभी नहीं देखा। भगवान के इस विराट रूप में उनका दिव्य तेज, अनंतता और विश्व व्यापी स्वरूप जो केवल उनके दिव्य योग की शक्ति से प्रकट होता है संभव है। अर्जन को इस दिव्य रूप के दर्शन से यह समझ मे आता है।कि भगवान का स्वरूप न केवल अद्द्भृत है बल्कि उसकी विशालता और शक्ति भी अतुलनीय हा - ShareChat