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#लोगों के लिए सीख
लोगों के लिए सीख - पत्रिका समय संत रविदास से सीखें जीवन जीने के मंत्र मन चंगा तो कठौती में गंगा, यदि मन की शुद्धता आपका मन पवित्र और निश्छल है, तो ईश्वर आपके हृदय के भीतर ही निवास करते हैं ही सुख मेहनत से कमाया हुआ धन श्रम का सम्मान देता है, अपने कर्म को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ करना ही सच्ची भक्ति है। जात-पात के भेदभाव को त्यागकर समानता का भाव सभी मनुष्यों को समान समझें, क्योंकि परमात्मा की दृष्टि में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता स्वयं को कर्ता मानने के बजाय अहंकार का त्याग विनम्र बनें , क्योंकि जब तक मन में 'मैं॰ यानी अहंकार है तब तक ईश्वर की प्राप्ति असंभव है | संतोष ही सबसे बड़ा धन है, सरल जीवन बाहरी दिखावे और आडंबरों को छोड़कर सरल जीवन जीयें और प्रेम को ही अपना परम धर्म मानें | [ " को पुस्तक संत रविदास के आधार पर महेश दत्त शर्मा पत्रिका समय संत रविदास से सीखें जीवन जीने के मंत्र मन चंगा तो कठौती में गंगा, यदि मन की शुद्धता आपका मन पवित्र और निश्छल है, तो ईश्वर आपके हृदय के भीतर ही निवास करते हैं ही सुख मेहनत से कमाया हुआ धन श्रम का सम्मान देता है, अपने कर्म को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ करना ही सच्ची भक्ति है। जात-पात के भेदभाव को त्यागकर समानता का भाव सभी मनुष्यों को समान समझें, क्योंकि परमात्मा की दृष्टि में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता स्वयं को कर्ता मानने के बजाय अहंकार का त्याग विनम्र बनें , क्योंकि जब तक मन में 'मैं॰ यानी अहंकार है तब तक ईश्वर की प्राप्ति असंभव है | संतोष ही सबसे बड़ा धन है, सरल जीवन बाहरी दिखावे और आडंबरों को छोड़कर सरल जीवन जीयें और प्रेम को ही अपना परम धर्म मानें | [ को पुस्तक संत रविदास के आधार पर महेश दत्त शर्मा - ShareChat