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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - जिँदगी ! शुक्रिया 'सनेही " शैलेन्द्र मोहन शुक्ल =ரி##க= ஈf=ரI तेरा फिर शुक्रिया !शुक्रिया !ज़िन्दगीIIऋ८ के सफ़र।  आह!अरमान फिर चाहतों  हाय।अपने ही अपने पे ढाते कहर। किसने कितने उजाड़े बसाये शहर। झूमती नाचती ,फिर रही दर-बदरII५८ आदमी ही तो मर-कर जिया जिन्दगी। तेरा फिर शुक्रिया ! शुक्रिया !ज़िन्दगीII% दिल के हरे ,आ मैं सीं लूँ तुझे। जख्म नेह की डोर अनुपम ,न ढीलूँ तुझे। हाँ प्रिये!प्रियतमा ! और जी लूँ तुझे।  ,पी लूँ तुझे।I% मुझपे  कर अमर धर अधर आह ! कितना ? जहर है पिया जिंदगी।  तेरा फिर शुक्रिया ! शुक्रिया! ज़िन्दगी।l४४ सँवरती रहो। सुहाने, ख्वाब बनकर डूब कर, प्यार में॰ प्यार करती रहो। अपने आगो़श में ही, निखरती रहो। होश में जोश-्जीवन मे भरती रहो।।५ तूफान, जलता दिया जिन्दगी। নত तेरा फिरशुक्रिया !शुक्रिया!ज़िन्दगीIl५४ कानपुर उत्तर प्रदेश भारत 2020-10-07 0 From vivo Notes जिँदगी ! शुक्रिया 'सनेही " शैलेन्द्र मोहन शुक्ल =ரி##க= ஈf=ரI तेरा फिर शुक्रिया !शुक्रिया !ज़िन्दगीIIऋ८ के सफ़र।  आह!अरमान फिर चाहतों  हाय।अपने ही अपने पे ढाते कहर। किसने कितने उजाड़े बसाये शहर। झूमती नाचती ,फिर रही दर-बदरII५८ आदमी ही तो मर-कर जिया जिन्दगी। तेरा फिर शुक्रिया ! शुक्रिया !ज़िन्दगीII% दिल के हरे ,आ मैं सीं लूँ तुझे। जख्म नेह की डोर अनुपम ,न ढीलूँ तुझे। हाँ प्रिये!प्रियतमा ! और जी लूँ तुझे।  ,पी लूँ तुझे।I% मुझपे  कर अमर धर अधर आह ! कितना ? जहर है पिया जिंदगी।  तेरा फिर शुक्रिया ! शुक्रिया! ज़िन्दगी।l४४ सँवरती रहो। सुहाने, ख्वाब बनकर डूब कर, प्यार में॰ प्यार करती रहो। अपने आगो़श में ही, निखरती रहो। होश में जोश-्जीवन मे भरती रहो।।५ तूफान, जलता दिया जिन्दगी। নত तेरा फिरशुक्रिया !शुक्रिया!ज़िन्दगीIl५४ कानपुर उत्तर प्रदेश भारत 2020-10-07 0 From vivo Notes - ShareChat