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#gajal & shayari
gajal & shayari - रामायण मे किससे क्या सीखें? ச स्थिर मति मर्यादा और शील ٦٩ परोपकारी वृत्ति अगस्त्य मृत्यु से निर्भयता मेघनाद ব্ধী মাননা त्रिजटा दुखीजन भरत : त्यागपूर्वक कर्त्तव्यपालन पातिव्रत्य और स्वाभिमान মানা शबरी : अडिग विश्वास. अटूट धैर्य स्वार्मा-स्वाभिमान की रक्षा अगट करुणा और शांत चित्त वाल्मीकि आदर्श सेवा. अनन्य भक्ति हनमान लक्मण : बड़े भाई की निष्काम सेवा लव॰कुश : वीरता-विनय का समन्वय उर्मिला : पतिःवियोग में पति सहयोग स्वार्थ से ऊपर व्यापक चिंतन जनक वियोग मे प्रतिपल प्रम-्ध्यान 872 संसार से तारने वाली सादेवाजी कवट ஈ்் মতন ব্ধা নিনো সিন-নিনন  सुतीक्ष्ण मुनि : ननिर्पल सीम्य एकाग्र भक्ति  भी पुत्र का हित-चिंतन काशल्या  71687 परिणाम से अभय अपनी शमता-भर प्रयास সমোত্তু विभीषण  अधर्मी स्वजन की वजाय सद्धर्म का चूनाव रामायण मे किससे क्या सीखें? ச स्थिर मति मर्यादा और शील ٦٩ परोपकारी वृत्ति अगस्त्य मृत्यु से निर्भयता मेघनाद ব্ধী মাননা त्रिजटा दुखीजन भरत : त्यागपूर्वक कर्त्तव्यपालन पातिव्रत्य और स्वाभिमान মানা शबरी : अडिग विश्वास. अटूट धैर्य स्वार्मा-स्वाभिमान की रक्षा अगट करुणा और शांत चित्त वाल्मीकि आदर्श सेवा. अनन्य भक्ति हनमान लक्मण : बड़े भाई की निष्काम सेवा लव॰कुश : वीरता-विनय का समन्वय उर्मिला : पतिःवियोग में पति सहयोग स्वार्थ से ऊपर व्यापक चिंतन जनक वियोग मे प्रतिपल प्रम-्ध्यान 872 संसार से तारने वाली सादेवाजी कवट ஈ்் মতন ব্ধা নিনো সিন-নিনন  सुतीक्ष्ण मुनि : ननिर्पल सीम्य एकाग्र भक्ति  भी पुत्र का हित-चिंतन काशल्या  71687 परिणाम से अभय अपनी शमता-भर प्रयास সমোত্তু विभीषण  अधर्मी स्वजन की वजाय सद्धर्म का चूनाव - ShareChat