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#अच्छी बातें #प्यारी बातें #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓ #सच्ची बातें
सच्ची बातें - आखिर ऐसा क्या हुआ कि देवी रुक्मणी रथ खिंचने को मजबूर हा गई.॰! दुर्वासा ने शर्त रखी कि भोजन एक बार महर्षि तभी स्वीकार करेंगे जब रुक्मणी स्वयं रथ खींचें। तपती रेत और तेज धूप में रथ खींचते खींचते रुक्मणी बेहद प्यास से व्याकुल हो गईं। विनती पर श्रीकृष्ण ने भूमि पर चरण प्रहार किया और वहीं से निर्मल जल फूट पड़ा, जिसे पीकर रुक्मणी की तृष्णा शांत हुई। पर बिना अनुमति जल पीने से महर्षि दुर्वासा क्रोधित हुए और उन्होंने श्राप दिया कि रुक्मणी और कृष्ण के बीच दूरी रहेगी। कहते हैं उसी कारण रुक्मणी मंदिर द्वारका से अलग स्थान पर है और जहां वह दिव्य जल प्रकट हुआ था, आज वही स्थान रहमानी कुंड के में पूजित है! रूप आखिर ऐसा क्या हुआ कि देवी रुक्मणी रथ खिंचने को मजबूर हा गई.॰! दुर्वासा ने शर्त रखी कि भोजन एक बार महर्षि तभी स्वीकार करेंगे जब रुक्मणी स्वयं रथ खींचें। तपती रेत और तेज धूप में रथ खींचते खींचते रुक्मणी बेहद प्यास से व्याकुल हो गईं। विनती पर श्रीकृष्ण ने भूमि पर चरण प्रहार किया और वहीं से निर्मल जल फूट पड़ा, जिसे पीकर रुक्मणी की तृष्णा शांत हुई। पर बिना अनुमति जल पीने से महर्षि दुर्वासा क्रोधित हुए और उन्होंने श्राप दिया कि रुक्मणी और कृष्ण के बीच दूरी रहेगी। कहते हैं उसी कारण रुक्मणी मंदिर द्वारका से अलग स्थान पर है और जहां वह दिव्य जल प्रकट हुआ था, आज वही स्थान रहमानी कुंड के में पूजित है! रूप - ShareChat