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#📝कविता / शायरी/ चारोळी #shero shayri #🖋शेरो-शायरी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - कितने खूबसुरत थे वो बचपन के दिन. दो दो उंगलीयां ৪ী, जुडते दोस्ती हो जाती थी !! कितने खूबसुरत थे वो बचपन के दिन. दो दो उंगलीयां ৪ী, जुडते दोस्ती हो जाती थी !! - ShareChat