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#चैत्र नवरात्र #maa चंद्रघंटा चैत्र शुक्ल नवरात्रि तृतीय दिवस 🌷🌷 21 मार्च शनिवार 2026 🍁 चंद्रघंटा स्तुति ध्यान कवचम् 🍁 चंद्रघंटा देवी पूजा विधि 🍁मां चंद्रघंटा की कथा 🍁 चंद्रघंटा दुर्गाजी के १०८ नाम 🍁🍁 दुर्गा चालीसा 🍁🍁 चंद्रघंटा देवी की आरती 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 21 मार्च शनिवार 2026 का शुभ मुहूर्त पंचांग नवरात्रि तृतीया दिनांक -21 मार्च 2026, शनिवार पक्ष: --शुक्ल पक्ष तिथि--: तृतीया (चैत्र शुक्ल तृतीया) विशेष: नवरात्रि का तीसरा दिन – माँ चन्द्रघण्टा पूजा तिथि विवरण तृतीया तिथि प्रारम्भ: 20 मार्च रात्रि (लगभग) तृतीया तिथि समाप्त: 21 मार्च सायं (लगभग) 👉 अतः पूजा हेतु पूरा दिन मान्य है। 🌟 वार--शनिवार (शनि देव का दिन) 👉 माँ चन्द्रघण्टा की पूजा से शनि संबंधित भय भी शांत होते हैं। सूर्योदय / सूर्यास्त (लगभग – भोपाल क्षेत्र) सूर्योदय: 06:20 AM सूर्यास्त: 06:30 PM *************** 👉🍁शुभ मुहूर्त - १.अभिजीत मुहूर्त 12:05 PM – 12:55 PM 👉 सर्वश्रेष्ठ कार्य एवं पूजा हेतु उत्तम। २.. ब्रह्म मुहूर्त 04:40 AM – 05:25 AM 👉 साधना, जप, ध्यान के लिए श्रेष्ठ ३..विजय मुहूर्त 02:30 PM – 03:15 PM 👉 विजय, साहस और शक्ति साधना हेतु ************* 👉🍁अशुभ समय १.राहुकाल 09:00 AM – 10:30 AM २. यमगण्ड 01:30 PM – 03:00 PM ३. गुलिक काल 06:20 AM – 07:50 AM ************ 👉🍁 नक्षत्र रेवती / अश्विनी (संक्रमण संभव) नया कार्य, यात्रा, साधना के लिए शुभ 👉🍁 योग शुभ / सिद्ध योग (लगभग) पूजा और आराधना के लिए अनुकूल 🌷🍀🌷🍀 मां चन्द्रघन्टा देवी🌷🍀🌷🍀🌷 शक्ति के रूप में विराजमान मां चंद्रघंटा मस्तक पर घंटे के आकार के चंद्रमा को धारण किए हुए हैं। देवी का यह तीसरा स्वरूप भक्तों का कल्याण करता है। इन्हें ज्ञान की देवी भी माना गया है। बाघ पर सवार मां चंद्रघंटा के चारों तरफ अद्भूत तेज है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। यह तीन नेत्रों और दस हाथों वाली हैं। इनके दस हाथों में कमल, धनुष-बाण, कमंडल, त्रिशूल और गदा जैसे अस्त्र-शस्त्र हैं। कंठ में सफेद पुष्पों की माला और शीर्ष पर रत्‍‌नजडि़त मुकुट विराजमान हैं। यह साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी और संपन्न होने का वरदान देती हैं। चंद्रघंटा माता का प्रभाव शुक्र ग्रह पर है. इस कारण से अगर किसी मनुष्य को शुक्र गृह की विपरीत परिस्थिति के कारण कोई कष्ट आदि हो तो उन्हें सम्पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ माँ चंद्रघंटा की आराधना और स्तुति करनी चाहिए. इससे उन्हें माँ चंद्रघंटा की कृपा से समस्त कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. माँ चंद्रघंटा की कृपा से मनुष्य को जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. चंद्रघंटा माता की कृपा से मनुष्य के अंदर साहस और आत्मबिस्वास का संचार होता है. माँ चंद्रघंटा का साधक निर्भीक होता है. समस्त नकारात्मक शक्तियों से माँ चंद्रघंटा अपने साधक की रक्षा करती है. 🌷🌷माँ चंद्रघंटा का ध्यान 🌷🌷 🍁 वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहारूढा चंद्रघण्टा यशस्विनीम्॥ अर्थ: मैं उस चंद्रघंटा माता को प्रणाम करता हूँ, जो अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने वाली हैं। उनका मुकुट आधे चंद्र के आकार का है और वे सिंह पर विराजमान हैं। वे महान यशस्विनी हैं। 🍁 मणिपुर स्थिताम् तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। खङ्ग, गदा, त्रिशूल, चापशर, पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥ अर्थ: यह तीसरी दुर्गा, जो मणिपुर चक्र (नाभि क्षेत्र) में स्थित हैं, तीन नेत्रों वाली हैं। उनके चारों हाथों में खड्ग, गदा, त्रिशूल, धनुष-बाण, पद्म (कमल), कमण्डलु और माला हैं, जो भयभीत करने वाले भी हैं और वर देने वाले भी हैं। 🍁 पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्। मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥ अर्थ: माँ चंद्रघंटा पीले वस्त्रों में सुसज्जित हैं, उनका हँसता चेहरा अत्यंत मधुर है और वे अनेक अलंकारों से विभूषित हैं। उनके गले में मणि की माला, झंकारियाँ, हार, बाजूबंद, झांझ और रत्नों से जड़े कुंडल हैं। 🍁 प्रफुल्ल वन्दना बिबाधारा कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्। कमनीयां लावण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥ अर्थ: माँ की वन्दना से हृदय प्रफुल्लित होता है। उनके कोमल और सुंदर गाल आकर्षक हैं। उनके कमर और नितम्ब अत्यंत सुडौल और मनोहर हैं। 🍁 पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यम् चंद्रघण्टेति विश्रुता॥ अर्थ: माँ चंद्रघंटा कमल पर विराजमान हैं और उनके हाथ में प्रचंड क्रोध से भरे शस्त्र हैं। जो भी उनकी भक्ति से प्रसन्न होता है, उसे वे अपने अनुग्रह से सब प्रकार का लाभ देती हैं। 🍁 या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ अर्थ: जो देवी सभी जीवों में माँ चंद्रघंटा के रूप में निवास करती हैं, मैं उन्हें बार-बार प्रणाम करता हूँ। 🌷🌷🌷चंद्रघंटा स्तुति 🌷🌷 माँ चंद्रघंटा की आराधना के लिए यहाँ दिए गए स्तोत्र का सम्पूर्ण भक्तिपूर्वक पाठ करें. यह अत्यंत ही सिद्ध स्तोत्र है. सम्पूर्ण श्रद्धापूर्वक इस माँ चंद्रघंटा स्तोत्र के पाठ का फल अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी होता है. आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्। अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥ चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टम् मन्त्र स्वरूपिणीम्। धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥ नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायिनीम्। सौभाग्यारोग्यदायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥ 🍀🍀 माँ चंद्रघंटा कवच 🍀🍀🍀 रहस्यम् शृणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने। श्री चन्द्रघण्टास्य कवचम् सर्वसिद्धिदायकम्॥ बिना न्यासम् बिना विनियोगम् बिना शापोध्दा बिना होमम्। स्नानम् शौचादि नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिदाम॥ कुशिष्याम् कुटिलाय वञ्चकाय निन्दकाय च। न दातव्यम् न दातव्यम् न दातव्यम् कदाचितम्॥ 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🌷🌷चंद्रघंटा के मंत्र 🌷🌷 🍁🍁चन्द्रघण्टा माला मंत्र 🍁🍁 ॐ चन्द्रार्धकृतशेखरायै सिंहवाहिन्यै त्रिनेत्रायै दशभुजायै त्रिशूलखड्गगदाधारिण्यै । धनुर्बाणपाशाङ्कुशधारिण्यै कमलकमण्डलुधारिण्यै मणिपुरचक्रनिलयायै । घण्टानादप्रियां भीषणरूपायै दुष्टदलनकारिण्यै भयहरिण्यै शत्रुनाशिन्यै । हिमगिरिनन्दिन्यै शिवप्रियायै शंकरार्धाङ्गिन्यै महाशक्त्यै जगदम्बिकायै । सुरासुरवन्दितायै त्रैलोक्यपालिन्यै त्रैलोक्यमोक्षप्रदायै जयायै विजयायै जयरूपायै । जयश्रियै जयप्रियायै शक्त्यै पराशक्त्यै योगिन्यै सिद्धिदायै ऋद्धिदायै स्मृतिदायै ज्ञानदायै । सुखप्रदायै कल्याण्यै अभयप्रदायै वरदायै सर्वसंकटहारिण्यै सर्वदुष्टनाशिन्यै नमो नमः ॥ ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥ चन्द्रघन्टा गायत्री ॐ चंन्द्रधंटायै च विदमहे अर्धचन्द्राय धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ॐ चंन्द्रधंटा दैव्यै नमः। ॐ क्लीं रोगान् रोधय चंद्रघण्टायै क्लीं फट् । ---++++++++++++++++++++++++++++ 🌷🌷श्रीचन्द्रघण्टा पंचश्लोकी 🌷🌷 🍁 सिंहवाहिनीं देवी त्रिनेत्रा चन्द्रशेखरा । त्रिशूलखड्गगदाधारा चन्द्रघण्टा नमोऽस्तु ते ॥१॥ हिन्दी अर्थ: सिंहवाहिनी, त्रिनेत्रधारी, मस्तक पर चन्द्र धारण करने वाली देवी चन्द्रघण्टा को नमस्कार। 🍁 चन्द्रार्धकृतकुण्डला सुशोभिता महेश्वरी । कण्ठस्थघण्टानिनदा चन्द्रघण्टा नमोऽस्तु ते ॥२॥ हिन्दी अर्थ: अर्धचन्द्र कुण्डल, कर्णस्थ घण्टा वाली महेश्वरी देवी को प्रणाम। 🍁 रक्तवस्त्रपरिधाना रक्तवर्णा मनोहरा । सर्वशत्रुविनाशाय चन्द्रघण्टा नमोऽस्तु ते ॥३॥ हिन्दी अर्थ : रक्तवर्णा, रक्तवस्त्र धारण, शत्रुहन्त्री चन्द्रघण्टा को नमस्कार है। 🍁 सुरासुरार्चिता नित्यं महाबला च भक्त्यया । सिंहनादप्रभाभीता चन्द्रघण्टा नमोऽस्तु ते ॥४॥ हिन्दी अर्थ: देव और दानव द्वारा पूजित, महाबलशाली, सिंहनाद से दुष्टों को भयभीत करने वाली चंद्रघंटा को नमस्कार। 🍁 कृपया परमेशानि भक्तानां वरदा सदा । दुर्गात्तारणकर्त्री त्वं चन्द्रघण्टा नमोऽस्तु ते ॥५॥ हिन्दी अर्थ : भक्तों को वर देने वाली, दुःख और संकट से पार करने वाली देवी चन्द्रघण्टा।को नमस्कार है। 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🌷🌷चंद्रघण्टा स्तुति 🌷🌷🌷🌷 जय मां चन्द्र घंटा सुख धाम ।पूर्ण कीजो मेरे काम । चन्द्र समान तू शीतल दाती।चन्द्र तेज किरणों में समाती। क्रोध को शान्त बनाने वाली। मीठे बोल सिखाने वाली। मन की मालक मन भाती हों ।चन्द्र घंटा तुम वरदाती हो। सुन्दर भाव को लाने वाली। हर संकट में बचाने वाली। हर बुधवार जो तुझे ध्याये ।श्रद्धा सहित जो विनय सुनाये। मूर्ति चन्द्र आकार बनाए । सन्मुख घी की जोत जलाए। शीश झुका कहे मन की बाता। पूर्ण आस करो जगतदातां कान्ची पुर स्थान तुम्हारा । करनाटिका में मान तुम्हारा । नाम तेरा रटूं महारानी।’चमन’ की रक्षा करो भवानी। 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🌷चंद्रघंटा देवी की पूजा विधि और प्रिय भोग प्रसाद 🌷 ब्रह्ममुहुर्त में उठकर स्नानादि से निवृत होकर माता का ध्यान करें और फिर पूजा स्थल पर गंगाजल से छिड़काव करें। इसके बाद माता का ध्यान करते हुए पांच घी के दीपक जलाएं और फिर माता को सफेद कमल या पीले पुष्प अर्पित करें विद्वानों के अनुसार तृतीय नवरात्रि के दिन माता चंद्रघंटा की पूजा—अर्चना से आनंद की प्राप्ति होती है। मां की विश्वासपूर्वक की गई पूजा से दुखों से मुक्ति मिल जाती है। मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बने मिष्ठान्न बहुत पसंद हैं. इसलिए उनको खीर का भोग लगाना सबसे अच्छा माना जाता है। मां को दूध या दूध से बने मिष्ठान्न का भोग लगाकर इसका दान जरूर करें। मां चंद्रघंटा की आराधना में रंगों का विशेष महत्व है। माता चंद्रघंटा को हरा, भूरा और सफेद रंग पसंद है। हालांकि उन्हें लाल रंग सबसे प्रिय है। मान्यता है कि मां के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा करते समय सफेद रंग का वस्त्र पहनना शुभ होता है। सफेद रंग शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🌷🌷🌷माता चंद्रघंटा की कथा🌷🌷🌷 नवरात्रि के नौ दिनों में तीसरा दिन माता चंद्रघंटा का है। चंद्रघंटा देवी की पूजा अर्चना करने वाले भक्तों को शक्ति तथा ओज की प्राप्ति होती है। चंद्रघंटा देवी का अवतार मुख्य रूप से दानवों तथा दैत्यों का विनाश करने के लिए हुआ। इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है। इस देवी के दस हाथ हैं। वे खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं। सिंह पर सवार इस देवी की मुद्रा युद्ध के लिए उद्धत रहने की है। इसके घंटे सी भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस कांपते रहते हैं। चंद्रघंटा माता की आराधना और स्तुति अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी होती है. माता की साधना करने वाले साधक के अंदर आत्मबिस्वास कूट कूट कर भर जाती है. समस्त पापों का नाश हो जाता है. जीवन में आने वाले बाधाओं का सामना करने का साहस आ जाता है. ह्रदय से भय का नाश हो जाता है. माता चंद्रघंटा अपने भक्तों की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती है. माता चंद्रघंटा असुरों के विनाश हेतु नवरात्रि की नौ देवियों में तीसरे रूप में अवतरित हुई थी। भयंकर दानवों को मारने वाली यह देवी हैं। असुरों की शक्ति को क्षीण करके, देवताओं का हक दिलाने वाली देवी चंद्रघंटा शक्ति का रूप हैं। शास्त्रों के ज्ञान से परिपूर्ण, मेधा शक्ति धारण करने वाली देवी चंद्रघंटा संपूर्ण जगत की पीड़ा को मिटाने वाली हैं। आपका मुख मंद मुस्कान से कान्तिवान, निर्मल, अलौकिक तथा चंद्रमा के बिम्ब प्रतीक सा उज्ज्वल है। ऐसा दिव्य स्वरूप देखकर भी महिषासुर ने देवी के अलौकिक स्वरूप पर प्रहार किया। उनके प्रेम, स्नेह का रूप तब भयंकर ज्वालामुखी की भांति लाल होने लगा, यह क्षण आश्चर्य से भरा हुआ था। उनके इस रूप का दर्शन करते ही महिषासुर भय से कांप उठा। उन्हें देखते ही दानव महिषासुर के प्राण तुरंत निकल गये। आखिर यमराज को देखकर भला कौन जीवित रह सकता है। तेज़ तथा शक्तिस्वरूपा देवी चन्द्रघण्टा ने जैसे ही राक्षस समूहों का संहार करने के लिए धनुष को आकाश की ओर किया, वैसे ही देवी के वाहन सिंह ने भी दहाड़ना शुरू कर दिया और माता पुनः घण्टे के शब्द से उस ध्वनि को और बढ़ा दिया। इस धनुष की टंकार, सिंह की दहाड़ एवं देवी चंद्रघंटा का असुरों को नष्ट करने का साहस बढ़ता गया तथा महिषासुर का समस्त दानव कुल छीन भिन्न होकर मरता रहा। देवी चंद्रघंटा एक अद्भुत शक्ति का रूप हैं परमात्मस्व देवी चंद्रघंटा के प्रसन्न होने पर जगत का अभ्युदय होता है, जगत का समस्त क्षेत्र हरा भरा, पावन हो जाता है, परंतु देवी चंद्रघंटा के क्रोध में आ जाने पर तत्काल ही असंख्य कुलों का सर्वनाश हो जाता है। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार महिषासुर के राक्षस कुल का अंत देवी चंद्रघंटा ने क्षण भर में कर डाला। इस बात का अनुभव मात्र ज्ञानी जन ही कर सकते हैं। 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🌷🌷🌷श्री चन्द्रघण्टा अष्टोत्तरशतनामावली 🌷🌷🌷 ( चंद्रघंटा दुर्गा जी के 108 नाम) ॐ चन्द्रघण्टायै नमः । ॐ चन्द्रमुख्यै नमः । ॐ चन्द्रार्धशेखरायै नमः । ॐ चन्द्रमौलिन्यै नमः । ॐ चन्द्रशोभायै नमः । ॐ चन्द्रकान्त्यै नमः । ॐ चन्द्रवदनायै नमः । ॐ चन्द्रहासायै नमः । ॐ चन्द्रनख्यै नमः । ॐ चन्द्रिकायै नमः ॥ (10) ॐ शंखधारिण्यै नमः । ॐ चक्रिण्यै नमः । ॐ गदाधारिण्यै नमः । ॐ त्रिशूलधारिण्यै नमः । ॐ वरदायै नमः । ॐ अभयप्रदायै नमः । ॐ सिंहवाहिन्यै नमः । ॐ रक्तवर्णायै नमः । ॐ त्रिनेत्रायै नमः । ॐ अष्टभुजायै नमः ॥ (20) ॐ क्षीरोद्भवायै नमः । ॐ करुणामय्यै नमः । ॐ दयारूपायै नमः । ॐ भीषणायै नमः । ॐ खड्गधारिण्यै नमः । ॐ धनुर्धारिण्यै नमः । ॐ पाशधारिण्यै नमः । ॐ अंकुशधारिण्यै नमः । ॐ वरप्रदायै नमः । ॐ शान्तिदायै नमः ॥ (30) ॐ सुरभ्यै नमः । ॐ सुरपूजितायै नमः । ॐ सुरेश्वर्यै नमः । ॐ सुररक्षिण्यै नमः । ॐ सुरनाथायै नमः । ॐ सुराराध्यायै नमः । ॐ सुरेश्वर्यै नमः । ॐ सुरजनन्यै नमः । ॐ सुरेश्वर्यै नमः । ॐ सुरवन्दितायै नमः ॥ (40) ॐ दुर्गायै नमः । ॐ दुर्गमहारिण्यै नमः । ॐ दुर्गप्रणतार्तिनाशिन्यै नमः । ॐ दुर्गदैत्यदलिन्यै नमः । ॐ दुर्गापीडापहारिण्यै नमः । ॐ दुर्गत्राणकायै नमः । ॐ दुर्गभयानाशिन्यै नमः । ॐ दुर्गमोक्षप्रदायै नमः । ॐ दुर्गेश्वर्यै नमः । ॐ दुर्गवन्दितायै नमः ॥ (50) ॐ महालक्ष्म्यै नमः । ॐ महादुर्गायै नमः । ॐ महासरस्वत्यै नमः । ॐ महाकाल्यै नमः । ॐ महेश्वर्यै नमः । ॐ महाशक्त्यै नमः । ॐ महादेव्यै नमः । ॐ महाभद्रायै नमः । ॐ महेश्वर्यै नमः । ॐ महाभक्तिप्रदायै नमः ॥ (60) ॐ कामाख्यायै नमः । ॐ काल्यै नमः । ॐ कालिकायै नमः । ॐ कालरात्र्यै नमः । ॐ कालहरिण्यै नमः । ॐ कालभद्रायै नमः । ॐ कालरक्षिण्यै नमः । ॐ कालशमन्यै नमः । ॐ कालदायै नमः । ॐ कालेश्वर्यै नमः ॥ (70) ॐ त्रैलोक्यमोहिन्यै नमः । ॐ त्रैलोक्यपालिन्यै नमः । ॐ त्रैलोक्यजनन्यै नमः । ॐ त्रैलोक्येश्वर्यै नमः । ॐ त्रैलोक्यरक्षिण्यै नमः । ॐ त्रैलोक्यवन्दितायै नमः । ॐ त्रैलोक्यमात्यै नमः । ॐ त्रैलोक्येश्वर्यै नमः । ॐ त्रैलोक्यजनन्यै नमः । ॐ त्रैलोक्यमोक्षदायै नमः ॥ (80) ॐ जयायै नमः । ॐ विजयायै नमः । ॐ जयानन्दायै नमः । ॐ जयरूपायै नमः । ॐ जयविभवायै नमः । ॐ जयपावन्यै नमः । ॐ जयश्रियै नमः । ॐ जयप्रियायै नमः । ॐ जयदायै नमः । ॐ जयेश्वर्यै नमः ॥ (90) ॐ शक्त्यै नमः । ॐ पराशक्त्यै नमः । ॐ योगिन्यै नमः । ॐ सिद्धिदायै नमः । ॐ ऋद्धिदायै नमः । ॐ स्मृतिदायै नमः । ॐ ज्ञानदायै नमः । ॐ सुखदायै नमः । ॐ मोक्षदायै नमः । ॐ कल्याण्यै नमः ॥ (100) ॐ शिवायै नमः । ॐ शिवपूजितायै नमः । ॐ शिवप्रियायै नमः । ॐ शिवानन्दायै नमः । ॐ शिवशक्त्यै नमः । ॐ शिवेश्वर्यै नमः । ॐ शिवजनन्यै नमः । ॐ सर्वेश्वर्यै नमः ॥ (108) 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🌷🌷 श्री चंद्रघंटा चालीसा 🌷🌷 दोहा जय चन्द्रघंटा मात भवानी। करहु कृपा मुझ पर जग जननी॥ चौपाई जय-जय-जय चन्द्रघंटा माता। सिंहवाहिनी तुम विख्याता॥१॥ स्वर्णवर्ण तन तेज अपारा। चन्द्र मुकुट शोभे सिर धारा॥२॥ दस भुजा धारी त्रिनयना। शक्ति रूप जग की तुम जनना॥३॥ खड्ग, गदा, त्रिशूल सुहाये। धनुष-बाण कर शोभा पाये॥४॥ कमल, कमण्डलु कर में धारे। भक्तन के तुम कष्ट निवारे॥५॥ कंठ घण्टा ध्वनि जब बाजे। दुष्ट दलन कर भय सब भागे॥६॥ सिंह सवारी शोभा पाती। भय हरती सब संकट नाशती॥७॥ मणिपुर चक्र की अधिपति माता। योगिनियों में श्रेष्ठ विख्याता॥८॥ शुक्र ग्रह की तुम अधिकारी। दोष हरन कर सुख संसारी॥९॥ भक्तन हित अवतार तुम्हारा। करो कृपा जगत उजियारा॥१०॥ दुष्ट दलन कर धर्म बढ़ाया। देवों को फिर हक दिलाया॥११॥ साहस, बल, बुद्धि की दाता। भय हरणी हे जगदंबा माता॥१२॥ जो नर-नारी ध्यान लगावे। मनवांछित फल वह सब पावे॥१३॥ दूध-खीर का भोग तुम्हें भाये। श्रद्धा से जो अर्पण लाये॥१४॥ सफेद पुष्प अर्पित जो कोई। कृपा तुम्हारी पावे सोई॥१५॥ भय, बाधा सब दूर भगाओ। संकट से जीवन को बचाओ॥१६॥ आत्मबल का दीप जलाओ। अज्ञान तम सब दूर हटाओ॥१७॥ क्रोध, लोभ, मोह हर लेती। सत्पथ पर जन को तुम देती॥१८॥ भक्तों की तुम लाज बचाती। हर विपदा से उन्हें उबारती॥१९॥ जो जन तेरा नाम जपावे। भवसागर से पार उतरावे॥२०॥ निर्भयता का वर तुम देती। दुर्बलता को दूर कर देती॥२१॥ शत्रु बाधा दूर भगाओ। अपने भक्तों को बचाओ॥२२॥ नित्य जो चालीसा गावे। सुख-समृद्धि घर में आवे॥२३॥ मन में श्रद्धा जो लावे। कृपा तुम्हारी सहज ही पावे॥२४॥ दीन-दुखी के तुम हो सहारा। सबका करतीं पार उतारा॥२५॥ ज्ञान, विवेक, बुद्धि की दाता। सर्वसिद्धि प्रदायिनी माता॥২৬॥ अन्न-धन की वर्षा करती। जीवन में खुशहाली भरती॥२७॥ पाप, ताप सब दूर हटाओ। जीवन में मंगल बरसाओ॥२८॥ संतन के तुम कष्ट हरती। दुष्टों का संहार भी करती॥२९॥ जो जन तेरा ध्यान लगाता। उसका जीवन सफल बनाता॥३०॥ कृपा दृष्टि जब तुम कर देती। भाग्य रेखा बदल भी देती॥३१॥ भक्तन के तुम प्राण अधारा। तुम बिन कौन करे उबारा॥३२॥ माँ! मुझ पर भी कृपा कीजै। अपने चरणों में स्थान दीजै॥३३॥ संकट मोचन नाम तुम्हारा। हरो दुखों का भार हमारा॥३४॥ भक्ति भाव मन में भर दीजै। ज्ञान ज्योति से जीवन सींचै॥३५॥ शरणागत को कभी न त्यागो। माँ! मुझको भी अपना भागो॥३६॥ तुम ही शक्ति, तुम ही माया। तुमसे ही यह जगत रचाया॥३७॥ नवदुर्गा में रूप तुम्हारा। तीसरा स्वरूप जगत उजियारा॥३८॥ जय-जय-जय चन्द्रघंटा माता। भव भय हरिणी सुख की दाता॥३९॥ जो यह पाठ करे श्रद्धा से। सिद्धि पावे माता कृपा से॥४०॥ दोहा जो चालीसा प्रेम से, पढ़े सुनावे कोय। सकल मनोरथ सिद्ध हों, माँ कृपा करे सोय॥ 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🌷🌷| माँ चंद्रघंटा की आरती ||🌷🌷 जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम॥ चन्द्र समाज तू शीतल दाती। चन्द्र तेज किरणों में समाती॥ मन की मालक मन भाती हो। चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो॥ सुन्दर भाव को लाने वाली। हर संकट में बचाने वाली॥ हर बुधवार को तुझे ध्याये। श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए॥ मूर्ति चन्द्र आकार बनाए। शीश झुका कहे मन की बाता॥ पूर्ण आस करो जगत दाता। कांचीपुर स्थान तुम्हारा॥ कर्नाटिका में मान तुम्हारा। नाम तेरा रटू महारानी॥ भक्त की रक्षा करो भवानी। जय माता चंद्रघंटा।। जय माता दी।। 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
चैत्र नवरात्र - चंद्रघंटा माता चंद्रघंटा माता - ShareChat