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#Jay shriradhe #जय श्रीराधे राधे
Jay shriradhe - कभी मन नदी कभी मन सागर विस्तार जो नापा खुद का 3|<<, मन बन गया गंगा सा निर्मल ये मन क्यूं करूं इसे , कलुषित जिस क्षण टूटा मन का दर्पन मोह का बंधन , तत्क्षण छूटा किरचें में दिख रहे हम ही हम तब जाकर ये जाना टूटना भी होता है अद्भुत. Dr Neeru Jain uote.in VoiceNArYour कभी मन नदी कभी मन सागर विस्तार जो नापा खुद का 3|<<, मन बन गया गंगा सा निर्मल ये मन क्यूं करूं इसे , कलुषित जिस क्षण टूटा मन का दर्पन मोह का बंधन , तत्क्षण छूटा किरचें में दिख रहे हम ही हम तब जाकर ये जाना टूटना भी होता है अद्भुत. Dr Neeru Jain uote.in VoiceNArYour - ShareChat