ShareChat
click to see wallet page
search
#DJJS Ldh
DJJS Ldh - 0 গন্ুপ্লুলি  8 "ম্লাঙনা' में गहरा उतरना है Enlightening Experiences  06 02  2026 प्रकाशन तिथि हमारे घर में कुछ समय से तनाव का वातावरण बना हुआ था। मेरी मंशा किसी को दुःख पहुँचाने की नहीं थी, फिर भी सारा दोष मेरे ऊपर आ गया था। जब किसी ने मेरी बात नहीं सुनी तो अपने मन की बात को गुरु महाराज जी को सुनाने के लिए मैं साधना में बैठ गई। साधना में बैठकर आँखों से आँसू बहे जा रहे थे। मन से एक ही प्रार्थना निकल रही थी - महाराज जी , मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है ? में मुझे ऐसा लगा, मानो मैं ब्रह्मलोक में पहुँच गई हूँ। वहाँ श्री गुरु उस अवस्था महाराज जी पहले तो ध्यान में विराजमान थे लेकिन फिर उन्होंने अपने नेत्र खोल लिए। इस दृश्य में मैंने स्वयं को भी खड़े देखा। जहाँ मैं खड़ी थी, वहाँ बहुत सारे पेड़ लगे हुए थे- कोई छोटा था तो कोई बहुत ही विशाल था। मैंने प्रश्न करते हुए पूछा- महाराज जी , यहाँ तरह - तरह के पेड़ क्यों हैं? गुरु महाराज जी ने अपने नेत्र खोले और बड़ी ही सहजता से कहने लगे- जो छोटा AO JAGRATISO पेड़ है, वह तुम हो। मैंने कहा- मैं सच में छोटा पेड़ ही हूँ, जो छोटे छोटे थपेड़ों से हिल जाता है। आप मुझे ऐसी अवस्था दे दीजिए कि कोई अच्छा कहे या बुरा कहे, महाराज जी , बोले या अपशब्द बोले, मुझ पर किसी की बात का कोई प्रभाव न पड़े। मेरे भला मन में कोई हलचल न हो। तभी गुरु महाराज जी ने उन पेड़ों में से एक बहुत बड़े और स्थिर वृक्ष की ओर संकेत किया और कहा- जब तुम इस अवस्था तक पहुँच जाओगी , तब तुम इन बातों से परे हो जाओगी। ध्यान रखना , जड़ें जितनी गहरी होंगी , उतना ऊँचा उठोगी। जितना ध्यान-साधना में स्वयं को भीतर उतारोगी , उतना ही मानसिक व आध्यात्मिक स्तर पर ऊँचा उठते जाओगी। तुम शीघ्र ही इस मैं पुनः को पाओगी। इसके बाद मैंने अनुभव किया कि॰ अपने शरीर में मज़बूती लौट आई हूँ इस दिव्य अनुभव के बाद घर की वह समस्या, जिसने मुझे भीतर से व्यथित कर रखा था, अपने आप सुलझ गई। गुरु महाराज जी की कृपा से सब कुछ clear हो गया। उस दिन मैंने यह संकल्प ले लिया कि अब से मुझे साधना में गहरा उतरना है। ঈন্ী ন্ধালভা नारायण गढ़ , हरियाणा মহুমান তিহত্ ভশানি আচন _শম্রাক ச-5 O9870311371 -1^11 Pr 50ச7 -- 03 శాా 3 '  r ಥ 0 গন্ুপ্লুলি  8 "ম্লাঙনা' में गहरा उतरना है Enlightening Experiences  06 02  2026 प्रकाशन तिथि हमारे घर में कुछ समय से तनाव का वातावरण बना हुआ था। मेरी मंशा किसी को दुःख पहुँचाने की नहीं थी, फिर भी सारा दोष मेरे ऊपर आ गया था। जब किसी ने मेरी बात नहीं सुनी तो अपने मन की बात को गुरु महाराज जी को सुनाने के लिए मैं साधना में बैठ गई। साधना में बैठकर आँखों से आँसू बहे जा रहे थे। मन से एक ही प्रार्थना निकल रही थी - महाराज जी , मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है ? में मुझे ऐसा लगा, मानो मैं ब्रह्मलोक में पहुँच गई हूँ। वहाँ श्री गुरु उस अवस्था महाराज जी पहले तो ध्यान में विराजमान थे लेकिन फिर उन्होंने अपने नेत्र खोल लिए। इस दृश्य में मैंने स्वयं को भी खड़े देखा। जहाँ मैं खड़ी थी, वहाँ बहुत सारे पेड़ लगे हुए थे- कोई छोटा था तो कोई बहुत ही विशाल था। मैंने प्रश्न करते हुए पूछा- महाराज जी , यहाँ तरह - तरह के पेड़ क्यों हैं? गुरु महाराज जी ने अपने नेत्र खोले और बड़ी ही सहजता से कहने लगे- जो छोटा AO JAGRATISO पेड़ है, वह तुम हो। मैंने कहा- मैं सच में छोटा पेड़ ही हूँ, जो छोटे छोटे थपेड़ों से हिल जाता है। आप मुझे ऐसी अवस्था दे दीजिए कि कोई अच्छा कहे या बुरा कहे, महाराज जी , बोले या अपशब्द बोले, मुझ पर किसी की बात का कोई प्रभाव न पड़े। मेरे भला मन में कोई हलचल न हो। तभी गुरु महाराज जी ने उन पेड़ों में से एक बहुत बड़े और स्थिर वृक्ष की ओर संकेत किया और कहा- जब तुम इस अवस्था तक पहुँच जाओगी , तब तुम इन बातों से परे हो जाओगी। ध्यान रखना , जड़ें जितनी गहरी होंगी , उतना ऊँचा उठोगी। जितना ध्यान-साधना में स्वयं को भीतर उतारोगी , उतना ही मानसिक व आध्यात्मिक स्तर पर ऊँचा उठते जाओगी। तुम शीघ्र ही इस मैं पुनः को पाओगी। इसके बाद मैंने अनुभव किया कि॰ अपने शरीर में मज़बूती लौट आई हूँ इस दिव्य अनुभव के बाद घर की वह समस्या, जिसने मुझे भीतर से व्यथित कर रखा था, अपने आप सुलझ गई। गुरु महाराज जी की कृपा से सब कुछ clear हो गया। उस दिन मैंने यह संकल्प ले लिया कि अब से मुझे साधना में गहरा उतरना है। ঈন্ী ন্ধালভা नारायण गढ़ , हरियाणा মহুমান তিহত্ ভশানি আচন _শম্রাক ச-5 O9870311371 -1^11 Pr 50ச7 -- 03 శాా 3 '  r ಥ - ShareChat