गरीब, काशी करोंत लेत हैं, आन कटावें शीश।
बन-बन भटका खात हैं, पावत ना जगदीश ।।
शास्त्र विरूद्ध साधक नकली-स्वार्थी गुरूओं द्वारा भ्रमित होकर कोई जंगल में जाता है। कोई काशी शहर में करौंत से सिर कटवाने में मुक्ति मानता है। इस प्रकार की व्यर्थ साधना जो शास्त्रोक्त नहीं है, करने से कोई लाभ नहीं होता। #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🙏गुरु महिमा😇 #📚कविता-कहानी संग्रह #🙏गीता ज्ञान🛕 #📗प्रेरक पुस्तकें📘
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