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#महाशिव रात्री की शुभकामनायें 🌺 #हैप्पी शिव रात्रि #महा शिव रात्रि की हार्दिक शुभकामनाऍ🥢
महाशिव रात्री की शुभकामनायें 🌺 - महाशिवरात्रि व्रत कथा Neeti प्राचीन काल की बात हे। एक नगर में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण  परंतु गरीबी के कारण विधिवत पूजा  रहता था। वह शिवभक्त था की कृष्ण " करने में असमर्थ रहता था। एक वर्ष फाल्गुन मास " पक्ष तिथि को वह अनजाने में पूरे दिन उपवास में रहा। रात्रि ಹ चतुर्दशी | होने पर वह जंगल में गया ओर ठंड से बचने के लिए बेल वृक्ष के नीचे बेठ गया। रात्रि भर वह जागता रहा और ठंड से बचने के लिए बेल वृक्ष की टहनियाँ तोड़ तोड़कर नीचे गिराता रहा। संयोगवश उसी वृक्ष के नीचे शिवलिंग स्थापित था। बेल पत्र, जल की बूँदें और க5 जागरण - ये तीर्नों महाशिवरात्रि की पूजा " अंग हे। इस प्रकार उस ब्राह्मण से अनजाने में ही महाशिवरात्रि की पूर्ण पूजा  संपन्न हो गई। कुछ समय पश्चात उस ब्राह्मण की मृत्यु हो गई।  यमदूत उसे लेने आए॰ परंतु तभी शिवगण प्रकट हुए और बोले - 06 महाशिवरात्रि का व्रती हे। इसने जागरण, उपवास ओर बेलपत्र अर्पण किया हे। इसे यमलोक नहीं, शिवलोक ले जाया जाएगा। " भगवान शिव की कृपा से वह ब्राह्मण समस्त पार्पों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त हुआ। तभी से शास्त्रों में कहा गया हे कि महाशिवरात्रि का व्रत अनजाने ्में भी किया जाए तो उसका फल अनेक जन्मों के पार्पों का नाश करता हे। इस दिन श्रद्घा, भक्ति और संयम से किया गया व्रत मनुष्य को मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता हे। कर्मेंट में जरूर लिखें ३० नमः शिवाय  महाशिवरात्रि व्रत कथा Neeti प्राचीन काल की बात हे। एक नगर में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण  परंतु गरीबी के कारण विधिवत पूजा  रहता था। वह शिवभक्त था की कृष्ण " करने में असमर्थ रहता था। एक वर्ष फाल्गुन मास " पक्ष तिथि को वह अनजाने में पूरे दिन उपवास में रहा। रात्रि ಹ चतुर्दशी | होने पर वह जंगल में गया ओर ठंड से बचने के लिए बेल वृक्ष के नीचे बेठ गया। रात्रि भर वह जागता रहा और ठंड से बचने के लिए बेल वृक्ष की टहनियाँ तोड़ तोड़कर नीचे गिराता रहा। संयोगवश उसी वृक्ष के नीचे शिवलिंग स्थापित था। बेल पत्र, जल की बूँदें और க5 जागरण - ये तीर्नों महाशिवरात्रि की पूजा " अंग हे। इस प्रकार उस ब्राह्मण से अनजाने में ही महाशिवरात्रि की पूर्ण पूजा  संपन्न हो गई। कुछ समय पश्चात उस ब्राह्मण की मृत्यु हो गई।  यमदूत उसे लेने आए॰ परंतु तभी शिवगण प्रकट हुए और बोले - 06 महाशिवरात्रि का व्रती हे। इसने जागरण, उपवास ओर बेलपत्र अर्पण किया हे। इसे यमलोक नहीं, शिवलोक ले जाया जाएगा। " भगवान शिव की कृपा से वह ब्राह्मण समस्त पार्पों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त हुआ। तभी से शास्त्रों में कहा गया हे कि महाशिवरात्रि का व्रत अनजाने ्में भी किया जाए तो उसका फल अनेक जन्मों के पार्पों का नाश करता हे। इस दिन श्रद्घा, भक्ति और संयम से किया गया व्रत मनुष्य को मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता हे। कर्मेंट में जरूर लिखें ३० नमः शिवाय - ShareChat