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##️⃣DilShayarana💘 #💞Heart touching शायरी✍️ #💔मरीज-ए-इश्क❤ #😒दर्द भरी शायरी🌸
#️⃣DilShayarana💘 - सूखा गुलाब मेरी हथेली पे रख गये। अपना नकाब मेरी हथेली पे रख गये। लिए मेरी तो इल्तजा थी چ खुशी मगर बिखरा वो ख्वाब मेरी हथेली पे रख गये क्या क्या सितम किये थे जमाने ने उनके साथ, सारा हिसाब मेरी हथेली पे रख गये। यूँ कर बढ़ा गये हैं वो जालिम तलब मेरी, थोड़ी शराब मेरी हथेली पे रख गये। रूमाल तो मेरा ही था लेकिन वो पौंछ कर, आँखों का आब मेरी हथेली पे रख गये। हर वर्क पर लिखे जो तराने सननी वही, वापस किताब मेरी हथेली पे रख गये। सूखा गुलाब मेरी हथेली पे रख गये। अपना नकाब मेरी हथेली पे रख गये। लिए मेरी तो इल्तजा थी چ खुशी मगर बिखरा वो ख्वाब मेरी हथेली पे रख गये क्या क्या सितम किये थे जमाने ने उनके साथ, सारा हिसाब मेरी हथेली पे रख गये। यूँ कर बढ़ा गये हैं वो जालिम तलब मेरी, थोड़ी शराब मेरी हथेली पे रख गये। रूमाल तो मेरा ही था लेकिन वो पौंछ कर, आँखों का आब मेरी हथेली पे रख गये। हर वर्क पर लिखे जो तराने सननी वही, वापस किताब मेरी हथेली पे रख गये। - ShareChat