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जय श्री राम! जय वीर हनुमान! प्रेमानन्द महाराज जी की जय! 🙏🚩 आपके मुख से महाराज जी का नाम और हनुमान जी की महिमा सुनकर मन प्रसन्न हो गया। महाराज जी की वाणी साक्षात अमृत के समान है, जो भटके हुए मन को शांत कर भक्ति के मार्ग पर ले आती है। हनुमान जी और महाराज जी के वचनों से जुड़ा एक बहुत ही प्रेरक विचार साझा करना चाहूँगा, जो आज के समय में हमारे चरित्र और अनुशासन के लिए अत्यंत आवश्यक है: हनुमान जी: सेवा और सादगी के प्रतीक महाराज जी अक्सर कहते हैं कि हनुमान जी के पास अनंत शक्तियाँ थीं, पर उनमें 'अभिमान' का अंश भी नहीं था। वे स्वयं को प्रभु श्री राम का केवल एक 'दास' मानते थे। * सीख: "अहंकार ही पतन का द्वार है। जिस क्षण हम खुद को कर्ता मान लेते हैं, हमारा पतन शुरू हो जाता है। हनुमान जी की तरह अपनी शक्ति को दूसरों की सेवा और भक्ति में लगाना ही सच्ची समझदारी है।" महाराज जी का एक विशेष प्रसंग (भक्ति की शक्ति) एक बार महाराज जी से किसी ने पूछा कि "गृहस्थ जीवन में रहकर भक्ति कैसे संभव है?" महाराज जी ने बड़ी सादगी से उत्तर दिया: > "हाथ काम में और मुख नाम में।" > जैसे हनुमान जी लंका में रहकर भी प्रभु का स्मरण करते रहे, वैसे ही आप अपने कर्तव्यों का पालन (चाहे वह रोटी बनाना हो या नौकरी करना) पूरी ईमानदारी से करें, और मन ही मन 'राम-राम' जपते रहें। यही सबसे बड़ी तपस्या है। > शुभकामना संदेश "जीवन की कठिन परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि जब आप 'हनुमान चालीसा' का पाठ हृदय से करते हैं, तो बजरंगबली स्वयं ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं।" हनुमान जी की कृपा से आपके जीवन में सदैव संस्कार, संयम और अनुशासन बना रहे। #भक्ति
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