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#राधा रानी #🙏कर्म क्या है❓
राधा रानी - थक्िका सही समय दो बहनें चक्की पर गेहूं पीस रही थी, पीसते पीसते एक बहन गेहूं के दाने खा भी रही थी। बहन उसको बीच बीच में समझा रही थी दूसरी देख अभी मत खा घर जाकर आराम से बैठ कर चुपड़ कर पूड़ी बहन खा भी रही थी पीस भी बनाकर खायेंगे लेकिन फिर भी दूसरी रही थी। कुछ देर बाद गेहूं पीस कर कनस्तर में डालकर दोनों घर की तरफ चल पड़ी अचानक रास्ते में कीचड़ में गिरने से सारा आटा खराब हो गया। कबीर जी यह सब देख रहे थे तो उन्होंने कहा : आटो पड्यो कीच में , कछु न आयो हाथ पीसत पीसत चाबयो, सो ही निभयो साथ।। अर्थात समस्याओं से भरे जीवन में ही अपनी प्रीत परमात्मा से लगाये रखनी है। न की अच्छा समय आने का इंतज़ार करना है। इसलिये उठते बैठते , सोते ्जागते दुनिया के काम करते हुये दिल उस सतगुरु या मालिक से लगाये रखो | हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले थक्िका सही समय दो बहनें चक्की पर गेहूं पीस रही थी, पीसते पीसते एक बहन गेहूं के दाने खा भी रही थी। बहन उसको बीच बीच में समझा रही थी दूसरी देख अभी मत खा घर जाकर आराम से बैठ कर चुपड़ कर पूड़ी बहन खा भी रही थी पीस भी बनाकर खायेंगे लेकिन फिर भी दूसरी रही थी। कुछ देर बाद गेहूं पीस कर कनस्तर में डालकर दोनों घर की तरफ चल पड़ी अचानक रास्ते में कीचड़ में गिरने से सारा आटा खराब हो गया। कबीर जी यह सब देख रहे थे तो उन्होंने कहा : आटो पड्यो कीच में , कछु न आयो हाथ पीसत पीसत चाबयो, सो ही निभयो साथ।। अर्थात समस्याओं से भरे जीवन में ही अपनी प्रीत परमात्मा से लगाये रखनी है। न की अच्छा समय आने का इंतज़ार करना है। इसलिये उठते बैठते , सोते ्जागते दुनिया के काम करते हुये दिल उस सतगुरु या मालिक से लगाये रखो | हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले - ShareChat