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#ब्रेकिंग न्यूज़🙏 - लाडली को १५०० रुपए दे रहे तो दिव्यांग को सिर्फ ६०० क्यों? हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब स्वतंत्र समय, इंदौर।   हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने रुपये प्रतिमाह दे रहा है। इस हिसाब से प्रदेश में राज्य सरकार से पूछा प्रदेश में लाडली बहनों को १५००  दिव्यांगजन को १८७५ रुपये प्रतिमाह पेंशन दो जाना  रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे है तो फिर दिव्यांग को सिर्फ चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। याचिकाकर्ता के आरंभिक तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने शासन को नोटिस " ६०० क्यों। कोर्ट ने शासन से यह जवाब उस जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मांगा है जिसमें प्रदेश में जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। केंद्र और राज्य के बीच झूल रहा है मामला  दिव्यांगजन को दी जाने वाली पेंशन की राशि बढ़ाए जाने याचिकाकर्ता दिव्यांगजन को दी जाने वाली पेंशन की राशि  की मांग की है। मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद में बढ़ोतरी की मांग करते हुए वर्ष २०२३ में भी हाई कोर्ट में होगी। हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका एडवोकेट मनीष जनहित याचिका प्रस्तुत कर चुके हैं। उस् जनहित याचिका " विजयवर्गीय ने दायर की है। कहा है कि प्रदेश में का निराकरण करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा था कि " दिव्यांगजन को सिर्फ ६०० रुपए प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है जबकि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम २०१६ वे राज्य शासन के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करें। राज्य  की धारा २४ के अनुसार दिव्यांजन को प्रदेश में चल रही  शासन दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा २४ के विभिन्न योजनाओं से कम से कम २५ प्रतिशत अधिक  प्रविधानों के तहत अभ्यावेदन का निराकरण करें। राशि पेशन के रूप में दी जाना चाहिए। शासन प्रदेश में एडवोकेट विजयवर्गीय ने बताया कि हमने शासन के समक्ष  लाडली बहना योजना के अंतर्गत महिलाओं को १५०० अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था। लाडली को १५०० रुपए दे रहे तो दिव्यांग को सिर्फ ६०० क्यों? हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब स्वतंत्र समय, इंदौर।   हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने रुपये प्रतिमाह दे रहा है। इस हिसाब से प्रदेश में राज्य सरकार से पूछा प्रदेश में लाडली बहनों को १५००  दिव्यांगजन को १८७५ रुपये प्रतिमाह पेंशन दो जाना  रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे है तो फिर दिव्यांग को सिर्फ चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। याचिकाकर्ता के आरंभिक तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने शासन को नोटिस " ६०० क्यों। कोर्ट ने शासन से यह जवाब उस जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मांगा है जिसमें प्रदेश में जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। केंद्र और राज्य के बीच झूल रहा है मामला  दिव्यांगजन को दी जाने वाली पेंशन की राशि बढ़ाए जाने याचिकाकर्ता दिव्यांगजन को दी जाने वाली पेंशन की राशि  की मांग की है। मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद में बढ़ोतरी की मांग करते हुए वर्ष २०२३ में भी हाई कोर्ट में होगी। हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका एडवोकेट मनीष जनहित याचिका प्रस्तुत कर चुके हैं। उस् जनहित याचिका " विजयवर्गीय ने दायर की है। कहा है कि प्रदेश में का निराकरण करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा था कि " दिव्यांगजन को सिर्फ ६०० रुपए प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है जबकि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम २०१६ वे राज्य शासन के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करें। राज्य  की धारा २४ के अनुसार दिव्यांजन को प्रदेश में चल रही  शासन दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा २४ के विभिन्न योजनाओं से कम से कम २५ प्रतिशत अधिक  प्रविधानों के तहत अभ्यावेदन का निराकरण करें। राशि पेशन के रूप में दी जाना चाहिए। शासन प्रदेश में एडवोकेट विजयवर्गीय ने बताया कि हमने शासन के समक्ष  लाडली बहना योजना के अंतर्गत महिलाओं को १५०० अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था। - ShareChat