नमस्ते! सूर्य नमस्कार (Sun Salutation) शरीर और मन को ऊर्जावान बनाने का सबसे बेहतरीन तरीका है। इसमें 12 चरणों का एक क्रम होता है, जो शरीर के अलग-अलग अंगों पर काम करता है।
यहाँ सूर्य नमस्कार के 12 आसन और उनके अभ्यास का सही तरीका दिया गया है:
सूर्य नमस्कार के 12 चरण
* प्रणामासन (Prayer Pose): सीधे खड़े हों और दोनों हाथों को छाती के पास 'नमस्ते' की मुद्रा में जोड़ें। गहरी सांस लें और छोड़ें।
* हस्त उत्तानासन (Raised Arms Pose): सांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और शरीर को पीछे की ओर झुकाएं।
* पादहस्तासन (Hand to Foot Pose): सांस छोड़ते हुए आगे झुकें और हथेलियों को पैरों के बगल में जमीन पर टिकाने की कोशिश करें। माथा घुटनों से सटाएं।
* अश्व संचालनासन (Equestrian Pose): सांस भरते हुए दाएं (Right) पैर को पीछे ले जाएं, दाएं घुटने को जमीन पर रखें और ऊपर की ओर देखें।
* पर्वतासन (Mountain Pose): सांस छोड़ते हुए बाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। शरीर का आकार 'V' जैसा बनाएं और एड़ियों को जमीन पर टिकाएं।
* अष्टांग नमस्कार (Salutation with Eight Parts): घुटनों, छाती और माथे को जमीन पर टिकाएं। कूल्हे थोड़े ऊपर रहेंगे। इसमें सांस को रोककर रखा जाता है।
* भुजंगासन (Cobra Pose): सांस भरते हुए शरीर के अगले हिस्से (छाती) को ऊपर उठाएं और आकाश की ओर देखें। कोहनियां थोड़ी मुड़ी हो सकती हैं।
* पर्वतासन (Mountain Pose): सांस छोड़ते हुए फिर से कूल्हों को ऊपर उठाएं और पर्वत की मुद्रा में आ जाएं।
* अश्व संचालनासन (Equestrian Pose): सांस भरते हुए दाएं पैर को दोनों हाथों के बीच वापस लाएं। बायां घुटना जमीन पर रखें।
* पादहस्तासन (Hand to Foot Pose): सांस छोड़ते हुए बाएं पैर को भी आगे लाएं और घुटनों से सिर सटाएं।
* हस्त उत्तानासन (Raised Arms Pose): सांस भरते हुए सीधे खड़े हों और हाथों को पीछे की ओर ले जाकर शरीर को स्ट्रेच करें।
* प्रणामासन (Prayer Pose): सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं और हाथों को प्रार्थना मुद्रा में जोड़ें।
अभ्यास के लिए कुछ जरूरी बातें
* समय: इसे सुबह खाली पेट करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।
* सावधानी: अगर आपको पीठ में तेज दर्द या हर्निया की समस्या है, तो इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें।
* गति: शुरुआत में इसे धीरे-धीरे करें ताकि आप सांसों के तालमेल (Breathing Technique) को समझ सकें।
> प्रो टिप: सूर्य नमस्कार का एक चक्र पूरा करने के बाद इसे दूसरे पैर (बाएं पैर) के साथ भी दोहराएं ताकि शरीर का संतुलन बना रहे।
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