ShareChat
click to see wallet page
search
⚫ खरा इतिहास बदलला जाऊच शकत नाही . परंतु खाजपाचे भामटे हे नीच काम करत आहेत . त्यांच्या गद्दार नेत्यांचे उदात्तीकरणही करत आहे .⚫ #पोलखोल करा कमळ्यांची #📢नागपूर अपडेट👉 #1️⃣महाराष्ट्र अपडेट्स #नमो गध्याला हटवा भारताला वाचवा #🏛️महाराष्ट्राचे राजकारण😎 ♦️ उघडा डोळे बघा नीट♦️
पोलखोल करा कमळ्यांची - ३. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति टिपू सुलतान का भारत की आज़ादी में टिपू केवल एक योद्धा ही नहीं , बल्कि एक चतुर क्या योगदान था ? कूटनीतिज्ञ भी थे। उन्होंने अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालने के लिए नेपोलियन बोनापार्ट (फ्रांस) , तुर्की और अफगानिस्तान के शासकों से संपर्क साधा और प्रोसेस दिखाएँ गठबंधन बनाने की कोशिश की। वे जानते थे कि 4٢4 ` सहयोग की अंग्रेजों को हराने के लिए 'मैसूर का मैसूर के शासक टिपू सुलतान, जिन्हें आवश्यकता है। शेर' (Sher-e-Mysore) भी कहा जाता है, भारतीय इतिहास के उन शुरुआती योद्धाओं में से एक थे ४. प्रशासनिक और आर्थिक सुधार उन्होंने मैसूर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बढ़ते कदमों लिए बैंकिंग , व्यापार और कृषि में कई सुधार किए। को भांप लिया था और उसका डटकर मुकाबला उनका मानना था कि एक आत्मनिर्भर राज्य ही Fl विदेशी ताकतों का मुकाबला कर सकता है। उन्होंने रेशम उद्योग (Silk Industry) की शुरुआत की, जो भारत की आज़ादी की नींव रखने में उनके योगदान आज भी कर्नाटक की पहचान है। को इन प्रमुख बिंदुओं से समझा जा सकता हैः ऐतिहासिक महत्व और शहादत टिपू सुलतान के बारे में सबसे प्रेरणादायक बात यह १. ब्रिटिश विस्तारवाद का कडा विरोध है कि उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी या उनके साथ टिपू सुलतान उन गिने-चुने भारतीय शासकों में से थे  युद्ध के मैदान में अपमानजनक संधि करने के बजाय जिन्होंने अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति श्रीरंगपट्टनम मरना बेहतर समझा। 4 मई १७९१ को को जल्दी समझ लिया था। उन्होंने चार एंग्लो मैसूर की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। (Anglo Mysore Wars) # ஒ்ரசககனி కళెt "भेड़ की तरह लंबी ज़िंदगी जीने से बेहतर है, शेर की दी। १७८२ से १७९१ तक उन्होंने अंग्रेजों को ব্ুনীনী  - टिपू सुलतान का प्रसिद्ध तरह एक दिन जीना। " दक्षिण भारत में पैर नहीं पसारने दिए। विचार मैइतनावीसथाकि २. रॉकेट तकनीक के जनक (Mysorean जबरदस्ती अंग्रोजोंकाजूता चाटलियाकरता Rockets) 25 वीर सावरकर 4 9& में तकनीक का बेहतरीन टिपू सुलतान इस्तेमाल किया। उन्होंने दुनिया के पहले लोहे से बने रॉकेट का आविष्कार और इस्तेमाल किया। ये रॉकेट ब्रिटिश सेना के लिए पूरी तरह से अनचाहे और विनाशकारी थे। बाद में अंग्रेजों ने इसी तकनीक का अध्ययन करके अपने रॉकेट विकसित किए। डेबऱ्या फडतूसने वनमो गध्याच्या अंधभक्तांनी ह्यावरजरुरउत्तरद्यावे . गुगलजेमिनीच्या सौजन्याने ३. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति टिपू सुलतान का भारत की आज़ादी में टिपू केवल एक योद्धा ही नहीं , बल्कि एक चतुर क्या योगदान था ? कूटनीतिज्ञ भी थे। उन्होंने अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालने के लिए नेपोलियन बोनापार्ट (फ्रांस) , तुर्की और अफगानिस्तान के शासकों से संपर्क साधा और प्रोसेस दिखाएँ गठबंधन बनाने की कोशिश की। वे जानते थे कि 4٢4 ` सहयोग की अंग्रेजों को हराने के लिए 'मैसूर का मैसूर के शासक टिपू सुलतान, जिन्हें आवश्यकता है। शेर' (Sher-e-Mysore) भी कहा जाता है, भारतीय इतिहास के उन शुरुआती योद्धाओं में से एक थे ४. प्रशासनिक और आर्थिक सुधार उन्होंने मैसूर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बढ़ते कदमों लिए बैंकिंग , व्यापार और कृषि में कई सुधार किए। को भांप लिया था और उसका डटकर मुकाबला उनका मानना था कि एक आत्मनिर्भर राज्य ही Fl विदेशी ताकतों का मुकाबला कर सकता है। उन्होंने रेशम उद्योग (Silk Industry) की शुरुआत की, जो भारत की आज़ादी की नींव रखने में उनके योगदान आज भी कर्नाटक की पहचान है। को इन प्रमुख बिंदुओं से समझा जा सकता हैः ऐतिहासिक महत्व और शहादत टिपू सुलतान के बारे में सबसे प्रेरणादायक बात यह १. ब्रिटिश विस्तारवाद का कडा विरोध है कि उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी या उनके साथ टिपू सुलतान उन गिने-चुने भारतीय शासकों में से थे  युद्ध के मैदान में अपमानजनक संधि करने के बजाय जिन्होंने अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' की नीति श्रीरंगपट्टनम मरना बेहतर समझा। 4 मई १७९१ को को जल्दी समझ लिया था। उन्होंने चार एंग्लो मैसूर की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। (Anglo Mysore Wars) # ஒ்ரசககனி కళెt "भेड़ की तरह लंबी ज़िंदगी जीने से बेहतर है, शेर की दी। १७८२ से १७९१ तक उन्होंने अंग्रेजों को ব্ুনীনী  - टिपू सुलतान का प्रसिद्ध तरह एक दिन जीना। " दक्षिण भारत में पैर नहीं पसारने दिए। विचार मैइतनावीसथाकि २. रॉकेट तकनीक के जनक (Mysorean जबरदस्ती अंग्रोजोंकाजूता चाटलियाकरता Rockets) 25 वीर सावरकर 4 9& में तकनीक का बेहतरीन टिपू सुलतान इस्तेमाल किया। उन्होंने दुनिया के पहले लोहे से बने रॉकेट का आविष्कार और इस्तेमाल किया। ये रॉकेट ब्रिटिश सेना के लिए पूरी तरह से अनचाहे और विनाशकारी थे। बाद में अंग्रेजों ने इसी तकनीक का अध्ययन करके अपने रॉकेट विकसित किए। डेबऱ्या फडतूसने वनमो गध्याच्या अंधभक्तांनी ह्यावरजरुरउत्तरद्यावे . गुगलजेमिनीच्या सौजन्याने - ShareChat