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#❤️जीवन की सीख #🙏गुरु महिमा😇
❤️जीवन की सीख - संत रविदास का जीवन परिचय संत रविदास  +04 गुरु रविदास जी পুবা নাস रेटास  3uam = गोवर्चनपुरा (वाराणसी) সখোন  जन्म = १३७७ ई वाराणसी (उत्तर प्रदेश) जःपख्थयान [న]= 1528 కీ  याराणसी  मृत्युस्थान  এিনা सतोरय दास "  कलसा देवी IHl  న शिप्या < मीरावई  निर्गुण बह्या की Mfh = লানি = বসায (আাবে) १ फ़रवरी २०२६ | रविदास जयंती  लोना देवी पत्नी న  हार्दिक शुभकामनाएँ -=1 येटा = यिजय टासजी गुर = रामानद ओर कवीर साहेद  दार्शनिक, समाज सुधारक॰ मोची ओर भगवान " पेशा = মন भाषाशेली = अवधी, राजस्थानी, खड़ीतोती उ्दू फारसी  समकालीन - झवीरदास फे समकालीन भापाशेली = अवधी, राजस्थानी खहीवोली उर्दू॰ फारसी  सामान्यपरिचय संत रविदास के जन्म के वियपरमे विभिन्न भांतिया हे। fazn रुनका जन्म १३७७ ्॰ तथा कुण १३८८ ईः तथा कुण विद्वान  ச १३९८ २. मानते हे। रेदास ने साथु संर्तों की संगनति से पर्याप्त व्यवहारिक   निर्गुण संप्रदाय के बढ्नत प्रसिद्ध संत तथा कबीर  ज्ञान प्राप्त किया था।ये के समकालीन थे। रविदास की बाणी भक्तिकी सच्ची भावना समाज के च्यापक रितकारी तथा मानय प्रेम से ओतःप्रोत थी। मूर्तिपूजा, तीर्थपात्रा  fরিeকe  जेसे दिखार्या में रथिदास का भी थिश्वास न था। यह य्यक्ति की आतरिक भायनाओं ओरआप्सी भाईचारे को ठी सच्चा वर्म मानते थे। रेदास ने अपनी काय्य रचना मे सरत च्ययहारिक भावा का प्रचोग किया ह। रेदास को उप्मा ओररूपक अलकार यिशेव प्रिय रहे ६। सीधे॰ सादे 184u fq' এeী ম মন ২রূ১ি के भावयड़ी सफा्ई से प्रकट ह। @Ambedkareducationstudy संत रविदास का जीवन परिचय संत रविदास  +04 गुरु रविदास जी পুবা নাস रेटास  3uam = गोवर्चनपुरा (वाराणसी) সখোন  जन्म = १३७७ ई वाराणसी (उत्तर प्रदेश) जःपख्थयान [న]= 1528 కీ  याराणसी  मृत्युस्थान  এিনা सतोरय दास "  कलसा देवी IHl  న शिप्या < मीरावई  निर्गुण बह्या की Mfh = লানি = বসায (আাবে) १ फ़रवरी २०२६ | रविदास जयंती  लोना देवी पत्नी న  हार्दिक शुभकामनाएँ -=1 येटा = यिजय टासजी गुर = रामानद ओर कवीर साहेद  दार्शनिक, समाज सुधारक॰ मोची ओर भगवान " पेशा = মন भाषाशेली = अवधी, राजस्थानी, खड़ीतोती उ्दू फारसी  समकालीन - झवीरदास फे समकालीन भापाशेली = अवधी, राजस्थानी खहीवोली उर्दू॰ फारसी  सामान्यपरिचय संत रविदास के जन्म के वियपरमे विभिन्न भांतिया हे। fazn रुनका जन्म १३७७ ्॰ तथा कुण १३८८ ईः तथा कुण विद्वान  ச १३९८ २. मानते हे। रेदास ने साथु संर्तों की संगनति से पर्याप्त व्यवहारिक   निर्गुण संप्रदाय के बढ्नत प्रसिद्ध संत तथा कबीर  ज्ञान प्राप्त किया था।ये के समकालीन थे। रविदास की बाणी भक्तिकी सच्ची भावना समाज के च्यापक रितकारी तथा मानय प्रेम से ओतःप्रोत थी। मूर्तिपूजा, तीर्थपात्रा  fরিeকe  जेसे दिखार्या में रथिदास का भी थिश्वास न था। यह य्यक्ति की आतरिक भायनाओं ओरआप्सी भाईचारे को ठी सच्चा वर्म मानते थे। रेदास ने अपनी काय्य रचना मे सरत च्ययहारिक भावा का प्रचोग किया ह। रेदास को उप्मा ओररूपक अलकार यिशेव प्रिय रहे ६। सीधे॰ सादे 184u fq' এeী ম মন ২রূ১ি के भावयड़ी सफा्ई से प्रकट ह। @Ambedkareducationstudy - ShareChat