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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - "ढोंगी मित्र" ना पालिए , "सर्पिल" जाकी धार. ! X, "नफ़रत" भीतर से Il "ज़ख्मी" करे हज़ार. ! "ढोंगी मित्र" ना पालिए , "सर्पिल" जाकी धार. ! X, "नफ़रत" भीतर से Il "ज़ख्मी" करे हज़ार. ! - ShareChat