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#❤️जीवन की सीख #गीत #गाना #फिल्म
❤️जीवन की सीख - एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में , रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में... दिन खाली खाली बर्तन है॰ दिन खाली खाली बर्तन है, और रात है जैसे अंधा कुआँ इन सूनी अंधेरी आँखों में, आँसू की जगह आता है धुआँ जीने की वजह तो कोई नहीं, मरने का बहाना ढूँढता है ढूँढता है...ढूँढता है एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आब ओन्दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में... इन उम्र से लंबी सडकों को. इन उम्र से लंबी सडकों को, मंजिल पे पहुँचते देखा नहीं बस दौड़ती फिरती 8, तो देखा नहीं हमने रहती  ठहरते इस अजनबी से शहर में, जाना पहचाना ढूँढता है 8...88 एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आबनओन्दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में Music By: অমনব Movie: uRiaT (1977) Lyrics Byः गुलज़ार साहब Ris Performed Byः भूपेंद्र Editing Byः उमेश मोतीरामाणी एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में , रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में... दिन खाली खाली बर्तन है॰ दिन खाली खाली बर्तन है, और रात है जैसे अंधा कुआँ इन सूनी अंधेरी आँखों में, आँसू की जगह आता है धुआँ जीने की वजह तो कोई नहीं, मरने का बहाना ढूँढता है ढूँढता है...ढूँढता है एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आब ओन्दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में... इन उम्र से लंबी सडकों को. इन उम्र से लंबी सडकों को, मंजिल पे पहुँचते देखा नहीं बस दौड़ती फिरती 8, तो देखा नहीं हमने रहती  ठहरते इस अजनबी से शहर में, जाना पहचाना ढूँढता है 8...88 एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आबनओन्दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में Music By: অমনব Movie: uRiaT (1977) Lyrics Byः गुलज़ार साहब Ris Performed Byः भूपेंद्र Editing Byः उमेश मोतीरामाणी - ShareChat