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#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - Ramesh Sariyala ( 1 ) पं चंदन जैसे संत है , सरुप जैसे संसार , वाके अंग लपटा रहै , भाग नहीं बिकार । सज्जन / संत चंदन के वृक्ष के समान होते हैं और यह संसार सांपों की तरह विषैला है । जिस प्रकार चंदन के वृक्ष से लिपटे रहने पर भी सांपों का ज़हर उस पर असर नहीं करता , वैसे ही संत सांसारिक लोभ - मोह में रहकर भी विकार रहित रहते हैं । उत्तम पंक्तियाँ : संत कबीर @uttampanktiyan - ShareChat