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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #☝ मेरे विचार
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - थक गई हूँ ए ज़िंदगी   गई हूँ ए ज़िंदगी , थक कितनी करूँ मैं तेरी बंदगी। क्या सार है इस जीवन का, क्या हल है इस अकेलेपन का। रिश्ते नाते और जुड़ाव सब, बेमानी रह गए हैं अब। रिश्तों के हर मायने दोअर्थी हो गए हैं इंसान के साथ भगवान भी स्वार्थी हो गए हैं। दिल नहीं करता अब संबंधों पर ग़ौर करने का क्योंकि बात करके भी आप लोगों के आसनों के आदी हो गए हैं| थक गई हूँ ए ज़िंदगी   गई हूँ ए ज़िंदगी , थक कितनी करूँ मैं तेरी बंदगी। क्या सार है इस जीवन का, क्या हल है इस अकेलेपन का। रिश्ते नाते और जुड़ाव सब, बेमानी रह गए हैं अब। रिश्तों के हर मायने दोअर्थी हो गए हैं इंसान के साथ भगवान भी स्वार्थी हो गए हैं। दिल नहीं करता अब संबंधों पर ग़ौर करने का क्योंकि बात करके भी आप लोगों के आसनों के आदी हो गए हैं| - ShareChat