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#जगत गुरु संत शिरोमणि सतगुरु रविदास महाराज जी
जगत गुरु संत शिरोमणि सतगुरु रविदास महाराज जी - समय पशनिका संत रविदास से सीखें जीवन जीने ಫ T7 मन चंगा तो कठौती में गंगा॰ यदि मन की शुद्धता आपका मन पवित्र और निश्छल है, तो ईश्वर आपके हृदय के भीतर ही निवास करते हैं धन ही सुख मेहनत से कमाया हुआ श्रम का सम्मान कर्म को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ देता है, अपने करना ही सच्ची भक्ति है जात-पात के भेदभाव को त्यागकर समानता का भाव सभी मनुष्यों को समान समझें, क्योंकि परमात्मा की दृष्टि में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता अहंकार का त्याग : स्वयं को कर्ता मानने के बजाय विनम्र बनें, क्योंकि जब तक मन में 'मैं' यानी अहंकार है, तब तक ईश्वर की प्राप्ति असंभव है। सरल जीवन : संतोष ही सबसे बड़ा धन है, बाहरी दिखावे और आडंबरों को छोड़कर सरल जीवन जीयें और प्रेम को ही अपना परम धर्म मानें | ~ महेरा दन शमा को पस्तक सत रविदास के आनार पर समय पशनिका संत रविदास से सीखें जीवन जीने ಫ T7 मन चंगा तो कठौती में गंगा॰ यदि मन की शुद्धता आपका मन पवित्र और निश्छल है, तो ईश्वर आपके हृदय के भीतर ही निवास करते हैं धन ही सुख मेहनत से कमाया हुआ श्रम का सम्मान कर्म को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ देता है, अपने करना ही सच्ची भक्ति है जात-पात के भेदभाव को त्यागकर समानता का भाव सभी मनुष्यों को समान समझें, क्योंकि परमात्मा की दृष्टि में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता अहंकार का त्याग : स्वयं को कर्ता मानने के बजाय विनम्र बनें, क्योंकि जब तक मन में 'मैं' यानी अहंकार है, तब तक ईश्वर की प्राप्ति असंभव है। सरल जीवन : संतोष ही सबसे बड़ा धन है, बाहरी दिखावे और आडंबरों को छोड़कर सरल जीवन जीयें और प्रेम को ही अपना परम धर्म मानें | ~ महेरा दन शमा को पस्तक सत रविदास के आनार पर - ShareChat