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#❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲 इबादत ​बिछड़ रहा है मुकद्दस महीना, दिल उदास है, रहमतों की जो बारिश थी, अब उसका अहसास है। ​जा रहा है वो बरकतों का साया लेकर, आँखें नम हैं मौला, बस तेरी मग़फ़िरत की आस है।#alwada Mahe Ramzan
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