संकट के समय उपदेश नहीं बल्कि सहारा और संवेदना देना ही सच्ची मानवता है। क्योंकि जब कोई व्यक्ति संकट और दुःख में होता है तब लोग उसकी मदद करने के बजाय उसे उपदेश देने लगते हैं। दुःख से घिरा हुआ मनुष्य मानसिक रूप से बहुत कमजोर हो जाता है। उस समय उसका मन इतना व्यथित होता है कि वह सही-गलत या ज्ञान की बातों को समझ नहीं पाता। ऐसे समय में उसे सबसे पहले सहारा संवेदना और अपनापन चाहिए। जैसे जो व्यक्ति पानी में डूब रहा हो उसे तैरने का सिद्धांत समझाने से कोई लाभ नहीं होता बल्कि पहले उसे बचाना जरूरी होता है। उसी प्रकार जीवन में भी संकट में पड़े व्यक्ति को पहले सहयोग और सहानुभूति देनी चाहिए। जब व्यक्ति दुःख से बाहर निकल जाता है और उसका मन शांत हो जाता है तब वह शिक्षा और सीख को आसानी से ग्रहण कर सकता है। इसलिए मानवता का सच्चा धर्म यही है कि हम दुखी लोगों की सहायता करें, उन्हें सहारा दें और प्रेम व संवेदना से उनका मन मजबूत बनाएं। आध्यात्मिक दार्शनिक अनमोल भक्ति शक्ति आराधना प्रार्थना भजन कीर्तन अर्चन गीत, देते संकट में सहारा ना उपदेश देते है, #Dete Sankat Men Sahara Naa Updesh Dete Hai, Writer ✍️ #Halendra Prasad,

