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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 मोहब्बत दिल से
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - मलन्मल धोएं शरीर को, धोएं ना मन का मैल। नहाएं गंगा गोमती, रहें बैल के बैल।" अर्थः मनुष्य अपने शरीर को तो रगड रगड़ कर सा़फ करता है और पवित्र नदियों (जैसे गंगा या गोमती) में स्नान भी करता है, लेकिन वह अपने मन के भीतर जमी बुराई, लालच और अहंकार को सा़फ नहीं करता| कबीर जी कहते हैं कि जब तक मन का विकार दूर नहीं होता, स्नान का कोई लाभ नहीं है। নাম্বী तब तक ऐसा व्यक्ति उस बैल के समान है जो पवित्र नदी में नहाने के बाद भी जानवर ही रहता है- उसकी बुद्धि या स्वभाव में कोई सुधार नहीं आता। मलन्मल धोएं शरीर को, धोएं ना मन का मैल। नहाएं गंगा गोमती, रहें बैल के बैल।" अर्थः मनुष्य अपने शरीर को तो रगड रगड़ कर सा़फ करता है और पवित्र नदियों (जैसे गंगा या गोमती) में स्नान भी करता है, लेकिन वह अपने मन के भीतर जमी बुराई, लालच और अहंकार को सा़फ नहीं करता| कबीर जी कहते हैं कि जब तक मन का विकार दूर नहीं होता, स्नान का कोई लाभ नहीं है। নাম্বী तब तक ऐसा व्यक्ति उस बैल के समान है जो पवित्र नदी में नहाने के बाद भी जानवर ही रहता है- उसकी बुद्धि या स्वभाव में कोई सुधार नहीं आता। - ShareChat