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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - वानर कभी अपनी मृत्यु का तमाशा नहीं बनाते। प्रभु श्री राम का वरदान है कि उनका अंत गुप्त रहे। इसलिए मृत्यु का आभास होते ही॰ वे संसार से दूर एकांत में जाकर की गोद में सो जाते हैं प्रकृति भर पहले ही जिसे मृत्यु की हफ्ते खबर जाए,वो साधारण जीव नहीं हो सकता। लग त्याग कर, चुपचाप अपना शरीर वानर अन्ननजल शोर, दीमकों को दान कर देते हैं। न कोई न कोई गवाह...बस पंचतत्व में विलीन, भीड़ इंसान अपनी मृत्य पर चाहता है, और वानर अपनी मृत्य पर शांति। घने जंगल में दीमक के टीले ही उनकी चिता बनते हैं ही उनका अंतिम संस्कार करती है,, और प्रकृति वानर कभी अपनी मृत्यु का तमाशा नहीं बनाते। प्रभु श्री राम का वरदान है कि उनका अंत गुप्त रहे। इसलिए मृत्यु का आभास होते ही॰ वे संसार से दूर एकांत में जाकर की गोद में सो जाते हैं प्रकृति भर पहले ही जिसे मृत्यु की हफ्ते खबर जाए,वो साधारण जीव नहीं हो सकता। लग त्याग कर, चुपचाप अपना शरीर वानर अन्ननजल शोर, दीमकों को दान कर देते हैं। न कोई न कोई गवाह...बस पंचतत्व में विलीन, भीड़ इंसान अपनी मृत्य पर चाहता है, और वानर अपनी मृत्य पर शांति। घने जंगल में दीमक के टीले ही उनकी चिता बनते हैं ही उनका अंतिम संस्कार करती है,, और प्रकृति - ShareChat