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जातिवाद से ऊपर उठकर देखेंगे तभी समझ आएगा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर कितने महान थे। वे किसी एक जाति, वर्ग या समुदाय के नेता नहीं थे— वे इंसानियत, समानता और संविधान के नेता थे। जिन्होंने खुद अपमान झेला, बहिष्कार सहा, लेकिन बदले में नफरत नहीं, कानून, तर्क और शिक्षा का रास्ता चुना। बाबासाहेब ने सिखाया कि जाति नहीं, योग्यता मायने रखती है जन्म नहीं, संघर्ष इंसान को महान बनाता है और भीख नहीं, अधिकार माँगे जाते हैं अगर आज कोई सुरक्षित है, अगर कोई पढ़ पा रहा है, अगर कोई सवाल कर पा रहा है— तो उसके पीछे बाबासाहेब की सोच खड़ी है। जातिवाद दीवारें बनाता है, अंबेडकर विचार पुल बनाते हैं। बाबासाहेब अंबेडकर की महानता सिर्फ किताबों में नहीं, हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में धड़कती है। जिस समाज ने उन्हें पानी तक छूने नहीं दिया, उसी समाज को उन्होंने बराबरी का अधिकार दिया। यह बदले की राजनीति नहीं थी, यह न्याय की क्रांति थी। उन्होंने कहा था— “मैं ऐसे धर्म को नहीं मानता जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा न सिखाए।” यही वजह है कि वे सिर्फ नेता नहीं, विचारधारा बन गए। अगर आज कोई दलित, पिछड़ा, महिला, अल्पसंख्यक सीधे आंखों में आंख डालकर बात कर सकता है, तो उसके पीछे बाबासाहेब की कलम है। जातिवाद डर सिखाता है, अंबेडकर साहस सिखाते हैं। इसलिए बाबासाहेब को समझने के लिए नाम नहीं, नज़र बदलनी पड़ती है। इसीलिए बाबासाहेब महान थे, हैं और रहेंगे। ✊📘 #baba saheb #बाबा साहेब डा० अम्बेडकर जी
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