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#✍️ साहित्य एवं शायरी #💑 दोस्त कभी बदल न जाना #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #JAZBAT Armano ke
✍️ साहित्य एवं शायरी - बहुत ढ्ूर निकल गई थी पतंग मेरी, मुझे धागा तोड़ना ही ठीक लगा, 8  समेटता तो और उलझ जाती ! बहुत ढ्ूर निकल गई थी पतंग मेरी, मुझे धागा तोड़ना ही ठीक लगा, 8  समेटता तो और उलझ जाती ! - ShareChat