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गरुड़ जी भगवान विष्णु का वाहन #भगवान विष्णु जी #विष्णु भगवान 🙏🏻 #भगवान विष्णु की प्रिय #भगवान विष्णु
भगवान विष्णु जी - 30 ద్ద్ सनातन fಓ भगवानविष्णुने गरुड़कोही अपनावाहन्क्यों बनाया? रहॅस्य जो बहृत कम लोग जानते हैं विष्णु  ने गरुड़ को ही अपना वाहन क्यों चुना इसका कारण भगवान बहुत कम लोग जानते हैं यह कथा शुरू होती है ऋषि कश्यप की दो पत्नियों विनता और कद्रू से विनता से जन्मे महाशक्तिशाली गरुड़ और कडू से जन्मे असंख्य नाग दोनों बहनों में प्रेम कम और ईर्ष्या अधिक थी एक दिन स्वर्ग में दिव्य घोड़ा उच्चैःश्रवा प्रकट हुआ उसकी पूंछ के रंग को लेकर दोनों में शर्त लग गई कडू ने छल किरr से घोडे़ की पूंछ काली करवा दी परिणामस्वरूकव्ड और अपने नाग पुत्रों विनता शर्त हार गई और दासी बना दी गई जब गरुड़ ने अपनी मां का यह अपमान देखा तो उनका हृदय क्रोध से भर उठा गरुड़ नागं मेरी मां को मुक्त करो नागों ने कहा अगर के पास गए और बोले लिए मुक्ति चाहिए तो स्वर्ग से हमारे अमृत कलश लेकर आओ गरुड़ 4 46 शर्त स्वीकार की और आकाश में उड़़ चले उनकी गति इतनी 1 प्रचंड थी कि देवता भी भयभीत हो उठे देवराज इंद्र का वज्ज्र भी गरुड़ को रोक नू॰सका अंततः गरुड़ अमृत कलश लेकर लौटे तभी वाननानना दिद्हैद् ईए गरुड् ने नृतमस्तव नोढन कहा प्रभु यह  4 ह मशnभl कको मुक्ति के लिए है गरुड़ की स्लिएनहिंदुह अमृत मेरे सनातन र्धम 761`6 46 भगवान विष्णा नेगरुहकोरही॰अपना वाहन क्योंननबनो . गm७ा eोंन 30 ద్ద్ सनातन fಓ भगवानविष्णुने गरुड़कोही अपनावाहन्क्यों बनाया? रहॅस्य जो बहृत कम लोग जानते हैं विष्णु  ने गरुड़ को ही अपना वाहन क्यों चुना इसका कारण भगवान बहुत कम लोग जानते हैं यह कथा शुरू होती है ऋषि कश्यप की दो पत्नियों विनता और कद्रू से विनता से जन्मे महाशक्तिशाली गरुड़ और कडू से जन्मे असंख्य नाग दोनों बहनों में प्रेम कम और ईर्ष्या अधिक थी एक दिन स्वर्ग में दिव्य घोड़ा उच्चैःश्रवा प्रकट हुआ उसकी पूंछ के रंग को लेकर दोनों में शर्त लग गई कडू ने छल किरr से घोडे़ की पूंछ काली करवा दी परिणामस्वरूकव्ड और अपने नाग पुत्रों विनता शर्त हार गई और दासी बना दी गई जब गरुड़ ने अपनी मां का यह अपमान देखा तो उनका हृदय क्रोध से भर उठा गरुड़ नागं मेरी मां को मुक्त करो नागों ने कहा अगर के पास गए और बोले लिए मुक्ति चाहिए तो स्वर्ग से हमारे अमृत कलश लेकर आओ गरुड़ 4 46 शर्त स्वीकार की और आकाश में उड़़ चले उनकी गति इतनी 1 प्रचंड थी कि देवता भी भयभीत हो उठे देवराज इंद्र का वज्ज्र भी गरुड़ को रोक नू॰सका अंततः गरुड़ अमृत कलश लेकर लौटे तभी वाननानना दिद्हैद् ईए गरुड् ने नृतमस्तव नोढन कहा प्रभु यह  4 ह मशnभl कको मुक्ति के लिए है गरुड़ की स्लिएनहिंदुह अमृत मेरे सनातन र्धम 761`6 46 भगवान विष्णा नेगरुहकोरही॰अपना वाहन क्योंननबनो . गm७ा eोंन - ShareChat