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#सोचने वाली बात #points to ponder #*આપણે વિચારીશું ખરા?*
सोचने वाली बात - लेसन्स फ्रॉम ग्रैेटथिकर्स मेहनत और लगन, हर जीत के यही दो रहस्य हैं की आंखों में ज्वाला दिखती है, बुजुर्गों युवाओं विक्टर ೯ಲಾಕ की आंखों में प्रकाश। सच्चा ज्ञानी जानता है कि वह कितना अज्ञानी है। से ही बुद्धिमान व्यक्ति जीवन की पुस्तकों कठिनाइयों में सांत्वना पाता है। यदि आपने कल्पना में महल नहीं बनाए, तो जमीन पर भी कुछ नहीं बना सकेंगे| लोगों में शक्ति की कमी नहीं होती, इच्छाशक्ति की कमी होती है। भविष्य के कई नाम हैं। कमजोरों के लिए वह फरवरी १८०२ जन्म : २६ निधन : २२ मई १८८५ अप्राप्य है, भयभीतों के लिए अनजान, साहसी लोगों के लिए वह अवसर है। बहुत हैं, सोचने वाले ஈ்காச নীলন নালী जुबानें मस्तिष्क बहुत कम। लेखक और राजनेता मरना कुछ नहीं है, पर जी न पाना थे। अपने साठ वर्ष से सबसे भयानक है। भी लंबे लेखन जीवन अच्छा बनना आसान है, न्यायपूर्ण बनना कठिन। में उन्होंने विभिन्न विपत्ति मनुष्य को गढ़ती है, समृद्धि उसे दानव विधाओं और शैलियों बना देती है। में लिखा है। पहल क्या है ? सही कार्य को बिना कहे कर देना। लेसन्स फ्रॉम ग्रैेटथिकर्स मेहनत और लगन, हर जीत के यही दो रहस्य हैं की आंखों में ज्वाला दिखती है, बुजुर्गों युवाओं विक्टर ೯ಲಾಕ की आंखों में प्रकाश। सच्चा ज्ञानी जानता है कि वह कितना अज्ञानी है। से ही बुद्धिमान व्यक्ति जीवन की पुस्तकों कठिनाइयों में सांत्वना पाता है। यदि आपने कल्पना में महल नहीं बनाए, तो जमीन पर भी कुछ नहीं बना सकेंगे| लोगों में शक्ति की कमी नहीं होती, इच्छाशक्ति की कमी होती है। भविष्य के कई नाम हैं। कमजोरों के लिए वह फरवरी १८०२ जन्म : २६ निधन : २२ मई १८८५ अप्राप्य है, भयभीतों के लिए अनजान, साहसी लोगों के लिए वह अवसर है। बहुत हैं, सोचने वाले ஈ்காச নীলন নালী जुबानें मस्तिष्क बहुत कम। लेखक और राजनेता मरना कुछ नहीं है, पर जी न पाना थे। अपने साठ वर्ष से सबसे भयानक है। भी लंबे लेखन जीवन अच्छा बनना आसान है, न्यायपूर्ण बनना कठिन। में उन्होंने विभिन्न विपत्ति मनुष्य को गढ़ती है, समृद्धि उसे दानव विधाओं और शैलियों बना देती है। में लिखा है। पहल क्या है ? सही कार्य को बिना कहे कर देना। - ShareChat