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गीता अध्याय 3 के श्लोक 13 ##santrampalji maharaj #kabir parmeshwar #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#santrampalji maharaj - गीता अध्याय 3श्लाक १३ यज्ञ में प्रतिष्ठित ईष्ट( पूर्ण परमात्मा ) को भोग लगाने के बाद बने प्रसाद को खाने वाले श्रेष्ठ पुरुष, सब पापों से मुक्त हो जाते हैं। जो पापी लोग अपना शरीर पोषण करने के लिये ही अन्न पकाते हैं, वे तो पाप को ही खाते हैं अर्थात् यज्ञ करके सर्व पापों से मुक्त हा जाते हैं। जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी मह्याराज SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI ( @SAINTRAMPALIIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ गीता अध्याय 3श्लाक १३ यज्ञ में प्रतिष्ठित ईष्ट( पूर्ण परमात्मा ) को भोग लगाने के बाद बने प्रसाद को खाने वाले श्रेष्ठ पुरुष, सब पापों से मुक्त हो जाते हैं। जो पापी लोग अपना शरीर पोषण करने के लिये ही अन्न पकाते हैं, वे तो पाप को ही खाते हैं अर्थात् यज्ञ करके सर्व पापों से मुक्त हा जाते हैं। जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी मह्याराज SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI ( @SAINTRAMPALIIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat