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✍मेरे पसंदीदा लेखक - ख्वाब 9TTTT -4 HIకడ सभी इंस्पेक्टर और कांस्टेबल से गुस्से में पूछता है -"हो क्या कमिश्नर वहां रहा है ये शहर में? और आप लोग कुछ कर क्यों नहीं रहे?" बोलो मिस्टर शक्ति| शक्ति कॉन्फिडेंट से जवाब देते हुए बोलता है- सर जांच चल रही है 'कमिश्नर से गुस्से में पूछता है-"जांच ही होती रहेगी या कुछ परिणाम भी मिलेगा।  फिर इंस्पेक्टर शक्ति आप ही मुझे पता है मुझ पर ऊपर से कितना दबाव आ रहा है इस केस को लीड कर रहे हैं ना। अगर १० दिन में मुझे कोई परिणाम नहीं मिला  तो।तो आप सस्पेंड कर दिए जाएंगे .. और नई जांच टीम फिर इस केस को होते हुए व हैंडल करेगी " शक्ति थोड़ा उदास कहता है-यस सर, मैं अपना बेस्ट दूंगा " कमिश्नर शक्ति का जवाब " हम्म" में देता है। फिर कमिश्नर वहां से चला जाता है।उसके जाते ही शक्ति गहरी सांस लेता है शक्ति रवि से कहता है- ' सुनो रवि, पिछले सारे इंसिडेंट की फाइल ले कर आओ।"जी सर- रवि कहता है।उमा उमा अपने घर पर खाना खा रही थी, तभी उसे काघर, शाम के 7 बज रहे थे अपने पास किसी के होने का एहसास होता है। उसका दिल जोर से धड़कने लगता है।वो पीछे है, उसे वहां कोई नहीं दिखाई देता  फिर से खाना मुड़ती खाने लगती है इस बार उसे ऐसा लगता है जैसे कोई उसके पीछे बैठा है और उसने उमा के कंधे पर हाथ रखा है उमा इस बार थोड़ी डर जाती है। वो और इधर ्उधर देखती है। पर उसे वहां कोई भी हिम्मत करके पीछे मुड़ती है दिखाई नहीं देता, तो वो थोड़ी सी डर जाती है। उमा मन में बोलती है- कहीं पता वो सुबह की तरह मस्ती कर रहा हो। "यह सोच  अर्नव तो नहीं है॰ क्या उमा चिल्लाते हुए और चिढ़ते हुए बोलती है- " अर्नव, यह तुम हो ना? अगर तुम নিল্ক্কল अच्छ। नहीं लग रहा | " उसके यह हो ना तो बस करो, मुझे यह मजाक  बोलने पर भी कोई जवाब नहीं आता, इसलिए वो फिर से बोलती है-" अर्नव बताओ, यह तुम हो ना? देखो अगर तुमने नहीं बताया तो मैं तुम्हारे भाई से बोल फिर मत कहना | इस बार भी कोई जवाब न आने पर उमा बोलती है कि दूंगी शायद उसका वहम था। यह सोच कर कि उसका वहम है, वो कमरे में चली जाती है | पर कहीं न कहीं उमा इससे थोड़ी डर गई थी।अब रात के 9 बज रहे थे शक्ति का वेट गेट पर ही बैठकर कर रही थी| वेट करते ्करते वो वहीं सो 3TT जाती है । उसके पास एक बोल आती है तो उसकी आंख खुल जाती है। जैसे ही है, उमा उस बोल को देखती है और सोचती है-" यह बोल उमा की आंख खुलती  নিল্কূল यहां कहां से आई?" उमा का यह सोचना जायज है, क्योंकि उसके घर के आसपास कोई घर नहीं होता, सिर्फ शक्ति के चाचा का घर था, जिसमें सिर्फ उसकी चाची , चाचा और अर्नव रहते उमा सोचती है, इस वक्त यह बॉल किसकी है। तब वो देखती है कि एक और बॉल उसके घर से आ रही है। और देखते ही ऐसी ना जाने कितनी बॉल्स उसके घर के अंदर से आ रही थीं | Unish Shivani Bhati ख्वाब 9TTTT -4 HIకడ सभी इंस्पेक्टर और कांस्टेबल से गुस्से में पूछता है -"हो क्या कमिश्नर वहां रहा है ये शहर में? और आप लोग कुछ कर क्यों नहीं रहे?" बोलो मिस्टर शक्ति| शक्ति कॉन्फिडेंट से जवाब देते हुए बोलता है- सर जांच चल रही है 'कमिश्नर से गुस्से में पूछता है-"जांच ही होती रहेगी या कुछ परिणाम भी मिलेगा।  फिर इंस्पेक्टर शक्ति आप ही मुझे पता है मुझ पर ऊपर से कितना दबाव आ रहा है इस केस को लीड कर रहे हैं ना। अगर १० दिन में मुझे कोई परिणाम नहीं मिला  तो।तो आप सस्पेंड कर दिए जाएंगे .. और नई जांच टीम फिर इस केस को होते हुए व हैंडल करेगी " शक्ति थोड़ा उदास कहता है-यस सर, मैं अपना बेस्ट दूंगा " कमिश्नर शक्ति का जवाब " हम्म" में देता है। फिर कमिश्नर वहां से चला जाता है।उसके जाते ही शक्ति गहरी सांस लेता है शक्ति रवि से कहता है- ' सुनो रवि, पिछले सारे इंसिडेंट की फाइल ले कर आओ।"जी सर- रवि कहता है।उमा उमा अपने घर पर खाना खा रही थी, तभी उसे काघर, शाम के 7 बज रहे थे अपने पास किसी के होने का एहसास होता है। उसका दिल जोर से धड़कने लगता है।वो पीछे है, उसे वहां कोई नहीं दिखाई देता  फिर से खाना मुड़ती खाने लगती है इस बार उसे ऐसा लगता है जैसे कोई उसके पीछे बैठा है और उसने उमा के कंधे पर हाथ रखा है उमा इस बार थोड़ी डर जाती है। वो और इधर ्उधर देखती है। पर उसे वहां कोई भी हिम्मत करके पीछे मुड़ती है दिखाई नहीं देता, तो वो थोड़ी सी डर जाती है। उमा मन में बोलती है- कहीं पता वो सुबह की तरह मस्ती कर रहा हो। "यह सोच  अर्नव तो नहीं है॰ क्या उमा चिल्लाते हुए और चिढ़ते हुए बोलती है- " अर्नव, यह तुम हो ना? अगर तुम নিল্ক্কল अच्छ। नहीं लग रहा | " उसके यह हो ना तो बस करो, मुझे यह मजाक  बोलने पर भी कोई जवाब नहीं आता, इसलिए वो फिर से बोलती है-" अर्नव बताओ, यह तुम हो ना? देखो अगर तुमने नहीं बताया तो मैं तुम्हारे भाई से बोल फिर मत कहना | इस बार भी कोई जवाब न आने पर उमा बोलती है कि दूंगी शायद उसका वहम था। यह सोच कर कि उसका वहम है, वो कमरे में चली जाती है | पर कहीं न कहीं उमा इससे थोड़ी डर गई थी।अब रात के 9 बज रहे थे शक्ति का वेट गेट पर ही बैठकर कर रही थी| वेट करते ्करते वो वहीं सो 3TT जाती है । उसके पास एक बोल आती है तो उसकी आंख खुल जाती है। जैसे ही है, उमा उस बोल को देखती है और सोचती है-" यह बोल उमा की आंख खुलती  নিল্কূল यहां कहां से आई?" उमा का यह सोचना जायज है, क्योंकि उसके घर के आसपास कोई घर नहीं होता, सिर्फ शक्ति के चाचा का घर था, जिसमें सिर्फ उसकी चाची , चाचा और अर्नव रहते उमा सोचती है, इस वक्त यह बॉल किसकी है। तब वो देखती है कि एक और बॉल उसके घर से आ रही है। और देखते ही ऐसी ना जाने कितनी बॉल्स उसके घर के अंदर से आ रही थीं | Unish Shivani Bhati - ShareChat