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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - इतने बेताब इतने बेक़रार क्यूँ हैं लोग जरूरत से होशियार क्यूँ हैं। मुंह पे तो सभी अपने हैं लेकिन॰ पीठ पीछे दुश्मन हज़ार क्यूँ हैं। हर चेहरे पर इक मुखौटा है यारो, लोग ज़हर में डूबे किरदार क्यूँ हैं। रहे हैं यहां इक दूजे को, सब काट लोग सभी दो धारी तलवार क्यूँ हैं। सब को सबकी हर खबर चाहिये , लोग चलते फिरते अखबार क्यूँ है | इतने बेताब इतने बेक़रार क्यूँ हैं लोग जरूरत से होशियार क्यूँ हैं। मुंह पे तो सभी अपने हैं लेकिन॰ पीठ पीछे दुश्मन हज़ार क्यूँ हैं। हर चेहरे पर इक मुखौटा है यारो, लोग ज़हर में डूबे किरदार क्यूँ हैं। रहे हैं यहां इक दूजे को, सब काट लोग सभी दो धारी तलवार क्यूँ हैं। सब को सबकी हर खबर चाहिये , लोग चलते फिरते अखबार क्यूँ है | - ShareChat