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#✍️ अनसुनी शायरी #🎤 महफिल ए शायरी #एक रचना रोज ...✍︎✍︎ #✍️ साहित्य एवं शायरी #💚 लाइफ़ की शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - उसके काबिल नहीं थे हम सो हमने फिर. आंखें पोंछी दर्द समेटा दिल उठाया और चलते बने..!! 100 खामोशियां.. उसके काबिल नहीं थे हम सो हमने फिर. आंखें पोंछी दर्द समेटा दिल उठाया और चलते बने..!! 100 खामोशियां.. - ShareChat