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#☆࿐ཽ༵༆༒जय महाकाल༒༆࿐ཽ༵☆
☆࿐ཽ༵༆༒जय महाकाल༒༆࿐ཽ༵☆ - राह में कांटे बहुत हैं, तो क्या हुआ, चलने वालों के कदम रुकते नहीं, मंज़िल उन्हीं को मिलती है, जो हालात से झुकते नहीं| राह में कांटे बहुत हैं, तो क्या हुआ, चलने वालों के कदम रुकते नहीं, मंज़िल उन्हीं को मिलती है, जो हालात से झुकते नहीं| - ShareChat