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Jai Kanwar Dahiya
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#हरि_आये_हरियाणे_नूं अजब नगर में ले गया, हमकूं सतगुरु आन। झिलके विम्ब अगाध गति, सूते चादर तान। अनन्त कोटि ब्रह्मण्ड का एक रति नहीं भार। सतगुरु पुरुष कबीर हैं कुल के सृजनहार।।
#santrampaljimaharaj
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