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#✍️ साहित्य एवं शायरी #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - खामोश पायल को कबतक निहारोगे चाहत हो (गर) खनक की तो कदर्मों को चलाके देखो. वहां सोना वहां रोना जहां कुछ नरहीं होना मजबूरी हो, न आने मे कोई माना 6 ತಳ ತrಹಕತ: खामोश पायल को कबतक निहारोगे चाहत हो (गर) खनक की तो कदर्मों को चलाके देखो. वहां सोना वहां रोना जहां कुछ नरहीं होना मजबूरी हो, न आने मे कोई माना 6 ತಳ ತrಹಕತ: - ShareChat